रायपुर में शुक्रवार से पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हो गया है। इस बदलाव के तहत शहर के 21 थानों का दायरा कम किया गया है, जिससे निगरानी और एक्शन दोनों में तेजी आएगी। अब फरियादी सीधे एसीपी या डीसीपी से शिकायत दर्ज करा सकेंगे और तुरंत कार्रवाई संभव होगी। अतिरिक्त डीसीपी और डीएसपी की तैनाती के साथ सुपरविजन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम से पुलिस को मजिस्ट्रेट के अधिकार मिल गए हैं। अब उन्हें किसी भी मामले में कलेक्टर या एसडीएम से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। इसका असर झगड़े, अवैध कब्जा, धरना प्रदर्शन और अन्य तनावपूर्ण स्थिति में पुलिस की त्वरित कार्रवाई में दिखेगा।

महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर भी तुरंत कार्रवाई की जाएगी। छेड़खानी, घरेलू हिंसा और धमकी जैसे मामलों में आरोपी को जेल भेजा जा सकता है। शहर के भीतर जोन सिस्टम लागू होने से रात्रि गश्त में सुधार होगा, चोरी और अन्य अपराधों पर काबू पाने में मदद मिलेगी। पुलिस का रिस्पॉन्स समय भी कम होगा और हर घटना पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।
रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में आईजी डॉ. संजीव शुक्ला ने चार्ज संभाला। उनके साथ आईपीएस श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने रायपुर ग्रामीण एसपी का जिम्मा लिया। पुलिस कमिश्नर कार्यालय अब जीई रोड संभागीय आयुक्त कार्यालय में स्थित होगा, जबकि ग्रामीण एसपी कार्यालय नवा रायपुर अटल नगर में रहेगा।
पुलिस कमिश्नरी सिस्टम से अपराधियों की निगरानी और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। धारा 144 लगाना, प्रतिबंधात्मक आदेश और हथियार लाइसेंस रद्द करने के अधिकार अब सीधे कमिश्नर के पास हैं। साथ ही ट्रैफिक सुधार, ड्रग्स तस्करी रोकने और साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए भी नई योजना बनाई जाएगी।
इस बदलाव के बाद रायपुर में पुलिसिंग अधिक प्रभावी और त्वरित होगी, जिससे शहर में कानून व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।



