चुंगी क्षतिपूर्ति के सहारे चल रहे निकाय, 125 करोड़ मिलने के बाद भी आत्मनिर्भरता दूर

प्रदेश के नगरीय निकायों को मार्च माह के लिए राज्य सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि जारी कर दी है, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पाए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी शहरी निकायों को कुल 9.48 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

इसमें 14 नगर निगमों को 6.23 करोड़ रुपये मिले, जबकि Raipur नगर निगम को अकेले 3.36 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा 56 नगर पालिकाओं को 1.83 करोड़ और नगर पंचायतों को 1.41 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह राशि निकायों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसी से कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन भुगतान होता है।

हर साल मिलती है भारी सहायता

अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार हर वर्ष लगभग 252 करोड़ रुपये चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में देती है। हालांकि पेंशन अंशदान, परिवार कल्याण और अन्य मदों में कटौती के बाद निकायों को करीब 125 करोड़ रुपये ही वास्तविक रूप से मिल पाते हैं। कटौती के बाद हर महीने औसतन लगभग 10 करोड़ रुपये निकायों में बांटे जाते हैं।

आय बढ़ाने के प्रयास कमजोर

चुंगी (ऑक्ट्रॉय) समाप्त होने के बाद निकायों को नुकसान से बचाने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई थी, ताकि वे अपने खर्च पूरे कर सकें और धीरे-धीरे खुद के आय स्रोत विकसित करें। लेकिन अधिकांश निकाय आज भी सरकार से मिलने वाली राशि पर ही निर्भर हैं।

इनकी आय मुख्य रूप से संपत्ति कर, दुकान किराया और जुर्माने तक सीमित है। नए राजस्व स्रोत विकसित न होने के कारण कई निकायों को कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए भी सरकारी सहायता का इंतजार करना पड़ता है।

कुछ ही निगम आर्थिक रूप से मजबूत

प्रदेश के 14 नगर निगमों में से केवल Raipur और Bilaspur नगर निगम ही अपने स्थापना खर्च का बड़ा हिस्सा स्वयं के राजस्व से पूरा कर पा रहे हैं।

रायपुर नगर निगम ने पिछले वर्ष लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका वार्षिक खर्च करीब 250 करोड़ रुपये है। इस खर्च में कर्मचारियों का वेतन, प्लेसमेंट स्टाफ का भुगतान, सफाई व्यवस्था और वाहन संचालन शामिल है।

इसी तरह बिलासपुर नगर निगम ने करीब 90 करोड़ रुपये की आय जुटाई, जबकि उसका खर्च लगभग 80 करोड़ रुपये रहा।

ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी

रायपुर नगर निगम जल्द ही लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रीन बॉण्ड जारी करने की तैयारी में है। नगरीय प्रशासन विभाग के अनुसार अन्य नगर निगमों को भी शामिल कर संयुक्त बॉण्ड जारी करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, ताकि विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकें।

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