11 हाउसिंग कॉलोनियों का सर्वे के बाद ही होगा निगम को हैंडओवर, पहले दूर होंगी कमियां

हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगर निगम के अधीन लाने की प्रक्रिया अब तेज कर दी गई है, लेकिन इसके पहले सभी कॉलोनियों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कमियां दूर नहीं होतीं, तब तक कॉलोनियों का हैंडओवर नहीं किया जाएगा।

इस संबंध में नगर निगम के चीफ इंजीनियर, जोन कमिश्नर और हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में अहम निर्णय लिया गया। तय हुआ कि दोनों विभागों की संयुक्त टीम कॉलोनियों का निरीक्षण करेगी और वहां सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और पेयजल व्यवस्था की स्थिति की जांच करेगी।

निरीक्षण के दौरान यदि कहीं भी निर्माण कार्य में खामियां या अधूरी सुविधाएं पाई जाती हैं, तो उसकी रिपोर्ट तैयार कर हाउसिंग बोर्ड को सौंपी जाएगी। सभी कमियां दूर होने के बाद ही कॉलोनियों को नगर निगम के हवाले किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इन कॉलोनियों में मरम्मत कार्य के लिए कोई स्थायी फंड उपलब्ध नहीं है, जिससे कई बार खर्च रहवासियों को उठाना पड़ता है। निगम के अधीन आने के बाद इन कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग किया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिलेगी।

पानी की व्यवस्था में भी सुधार होने की संभावना है। अभी इन कॉलोनियों में ट्यूबवेल पर निर्भरता अधिक है, जिससे गर्मी के समय पानी की समस्या बढ़ जाती है। निगम के अधीन आने के बाद फिल्टर प्लांट के जरिए स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जाएगी।

इसके अलावा, शहर के विस्तार को ध्यान में रखते हुए सेजबहार, बोरियाकला और पिरदा क्षेत्रों की कॉलोनियों को भी भविष्य में नगर निगम में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

इन कॉलोनियों का होगा हैंडओवर:
कचना फेस-2, भावना नगर फेस-2, शंकर नगर स्टूडियो अपार्टमेंट, हिमालयन हाइट्स डूमरतराई फेस-1 और 2, कमल विहार (इंद्रप्रस्थ), बोरियाखुर्द (सरोना), रायपुरा (हीरापुर) समेत कुल 11 कॉलोनियां।

हाउसिंग बोर्ड के अपर आयुक्त सुनील कुमार भगत ने बताया कि संयुक्त निरीक्षण के बाद सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में सुधार कराया जाएगा, और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही कॉलोनियों को निगम को सौंपा जाएगा।

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