पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब रायपुर में एलपीजी गैस की सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। इसी को लेकर कलेक्ट्रेट में प्रशासन और उद्योगपतियों के बीच एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा व्यावसायिक उपयोग के लिए लगभग 70 प्रतिशत क्षमता के अनुसार ही गैस उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे औद्योगिक इकाइयों को पर्याप्त मात्रा में एलपीजी नहीं मिल पा रही है। खासकर प्लास्टिक कंटेनर बनाने वाले उद्योग, जो पूरी तरह एलपीजी पर निर्भर हैं, इस कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। कई इकाइयों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है, जबकि कुछ के बंद होने की स्थिति बन गई है।
प्रशासन की ओर से निगम आयुक्त विश्वदीप ने उद्योग संचालकों को निर्देश दिया कि वे अपनी वास्तविक गैस आवश्यकता की जानकारी शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि जरूरत के अनुसार उचित व्यवस्था की जा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उपलब्ध स्टॉक और मांग को देखते हुए सप्लाई को संतुलित किया जाएगा।
अपर कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर ने बताया कि गैस की आपूर्ति घरेलू और व्यावसायिक श्रेणियों में विभाजित होती है, और उद्योगों को व्यावसायिक श्रेणी के तहत ही गैस मिलती है। बैठक में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, खाद्य विभाग और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और समाधान के विकल्पों पर चर्चा की।

