छत्तीसगढ़ में चावल घोटाला: अब खाद्य विभाग के अधिकारियों से होगी पूछताछ

​छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे राज्य में कई घोटालों का पर्दाफाश हुआ है। इन घोटालों में सरकारी अधिकारियों, राशन दुकानदारों और अन्य संबंधित पक्षों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है।

2024 में, राज्य में 219 करोड़ रुपये से अधिक के चावल घोटाले की जांच के लिए विधानसभा समिति का गठन किया गया। इस समिति ने खाद्य विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की और संचालनालय के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी जांच की। समिति की बैठकों में राशन दुकानों के स्टॉक मिलान, नियमों के विपरीत बाजार से चावल खरीदने और बिना उचित प्रक्रिया के वसूली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा, एक फर्जी संघ के अध्यक्ष द्वारा कार्डधारकों की जगह दीवार की फोटो अपलोड करके एपीएल चावल चोरी करने का मामला भी सामने आया, जिसमें उसने एक दिन में 433 मिनट में 460 से अधिक लोगों को राशन वितरित किया। इस फर्जी अध्यक्ष ने चोरी किए गए चावल से संपत्ति बनाई और अब अपने बेटे के साथ मिलकर हवाला का कारोबार कर रहा है, जिसकी शिकायत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में की गई है।​

खाद्य विभाग ने इस घोटाले में शामिल 39 राशन दुकानों में से 4 को निलंबित कर दिया और अन्य के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी किए हैं। इन दुकानों से 7971 क्विंटल चावल की रिकवरी होनी बाकी है। इसके अलावा, अभनपुर की दो सरकारी दुकानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। खाद्य विभाग ने राशन दुकानों के संचालकों से स्टॉक की कमी का कारण पूछा है, जिसमें कुछ दुकानदारों ने टेबलेट व ई-पोस मशीन के माध्यम से खाद्यान्न वितरण के कारण स्टॉक का सही मिलान नहीं होने की बात कही है। ​

एक अन्य मामले में, 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 175 करोड़ रुपये के कथित चावल मिल घोटाले में छत्तीसगढ़ चावल मिल मालिक एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को गिरफ्तार किया। ईडी ने आरोप लगाया कि खरीफ विपणन सत्र 2021-22 के दौरान चावल मिल मालिकों से अवैध वसूली की जा रही थी, जिसमें चंद्राकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इस घोटाले में चावल मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राज्य विपणन महासंघ लिमिटेड (मार्कफेड) के अधिकारियों के साथ मिलकर धान की कस्टम मिलिंग के लिए चावल मिल मालिकों से रिश्वत ली।

इसके अलावा, 2020 में, अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने खुलासा किया कि अप्रैल 2013 से दिसंबर 2018 के बीच 10 लाख फर्जी राशन कार्डों के माध्यम से लगभग 11 लाख टन चावल की हेराफेरी की गई, जिससे राज्य को 2718 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में तत्कालीन खाद्य अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया। ​

इन घोटालों ने छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार और जांच एजेंसियों द्वारा इन मामलों की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके और जनता का विश्वास बहाल किया जा सके।​

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