कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना की मांग करते हुए इसे असमानता की सच्चाई उजागर करने का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने पूर्व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष और शिक्षाविद् प्रोफेसर सुखदेव थोराट के साथ बातचीत में दलितों के शासन, शिक्षा, नौकरशाही और संसाधनों तक पहुंच के मुद्दों पर चर्चा की। गांधी ने 20 मार्च 1927 को डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा महाड़ सत्याग्रह का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल पानी के अधिकार के लिए नहीं, बल्कि समानता और सम्मान के लिए संघर्ष था, जो आज भी जारी है।

बीजेपी ने राहुल गांधी की इस मांग की आलोचना की है। पार्टी ने कांग्रेस पर पिछड़े वर्गों के नेताओं को दरकिनार करने और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के नेताओं को हाशिए पर रखा है, जो अपने मेहनत और प्रतिबद्धता से आगे बढ़े हैं।
यह विवाद दर्शाता है कि जातिगत जनगणना का मुद्दा भारतीय राजनीति में कितना संवेदनशील है, जहां एक ओर इसे सामाजिक न्याय के लिए आवश्यक बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
