विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार फंगल संक्रमण के इलाज और डायग्नोस्टिक टेस्ट्स पर दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स जारी की हैं, जो इन बीमारियों के खिलाफ दवाओं और जांच उपकरणों की गंभीर कमी को उजागर करती हैं।

मुख्य बिंदु:

1. जानलेवा फंगल संक्रमण बढ़ रहे हैं

  • WHO की फंगल प्राथमिकता रोगजनक सूची (FPPL) में शामिल कुछ फंगस 88% तक मृत्यु दर पैदा कर सकते हैं।
  • इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड (कमजोर प्रतिरक्षा वाले) मरीजों की संख्या बढ़ने से ये संक्रमण और खतरनाक हो रहे हैं।

2. दवाओं की कमी और धीमा रिसर्च

  • पिछले 10 साल में केवल 4 नई एंटीफंगल दवाएं अमेरिका, यूरोप या चीन में मंजूर हुई हैं।
  • वर्तमान में 9 दवाएं क्लिनिकल ट्रायल में हैं, लेकिन केवल 3 फाइनल फेज (फेज 3) में पहुंची हैं।
  • इसका मतलब है कि अगले 10 साल में भी नई दवाओं की संख्या बहुत कम होगी।

3. डायग्नोस्टिक टेस्ट्स की समस्या

  • ज्यादातर फंगल टेस्ट्स महंगे हैं और अच्छी लैब व ट्रेंड स्टाफ की जरूरत होती है।
  • निम्न और मध्यम आय वाले देशों (LMICs) में ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
  • WHO का कहना है कि सस्ते, तेज और पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट्स विकसित करने की जरूरत है।

क्यों है यह चिंताजनक?

  • फंगल संक्रमण धीरे-धीरे दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो रहे हैं।
  • स्वास्थ्यकर्मियों को अक्सर इन संक्रमणों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती।
  • नए शोध और विकास (R&D) में तेजी लाने की जरूरत है।

WHO की सिफारिशें:

✔ नई दवाओं और टेस्ट्स पर शोध बढ़ाना
✔ सस्ती और आसानी से उपलब्ध जांच प्रणाली विकसित करना
✔ स्वास्थ्यकर्मियों को फंगल संक्रमण के प्रति जागरूक करना

यह रिपोर्ट दुनिया को चेतावनी देती है कि फंगल संक्रमण एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकते हैं, अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए।

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