खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 12 साल की सबसे छोटी तैराक, बड़े खिलाड़ियों से मुकाबले के बावजूद दिखाई जबरदस्त हिम्मत

छत्तीसगढ़ को पहले दिन 2 मेडल
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले दिन छत्तीसगढ़ ने शानदार शुरुआत करते हुए 2 मेडल अपने नाम किए।
- अनुष्का भगत ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में सिल्वर जीता
- निखिल ने इसी इवेंट के पुरुष वर्ग में ब्रॉन्ज हासिल किया
12 साल की सपना बनी चर्चा का केंद्र
मेडल भले ही न जीत सकीं, लेकिन 200 मीटर फ्री-स्टाइल में हिस्सा लेने वाली सपना कोरसा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सिर्फ 12 साल की सपना इस प्रतियोगिता की सबसे कम उम्र की तैराक रहीं और बीजापुर की रहने वाली हैं।
जब सभी फिनिश कर चुके थे, सपना अकेली तैर रही थीं
रेस की शुरुआत में सपना ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन जल्द ही पीछे रह गईं।
- बाकी एथलीट्स ने 2:39 से 2:58 मिनट में रेस पूरी कर ली
- सपना का समय रहा 4:27 मिनट
करीब डेढ़ से ढाई मिनट तक सपना अकेले पूल में तैरती रहीं। दर्शकों को लगा कि वह बीच में रेस छोड़ सकती हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिनिश लाइन तक पहुंचीं।
उनके इस जज्बे को देखकर पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया और तालियों से उनका स्वागत किया गया।
सपना का जज्बा: खुद से मुकाबला
सपना ने कहा कि पीछे रह जाने के बाद उनका मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि खुद से था।
अगर वह बीच में रुक जातीं, तो खुद से हार जातीं। उनका मानना है कि बेहतर तैयारी मिलती तो वह मेडल भी जीत सकती थीं।
सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धि
सपना के पिता किसान हैं, जिससे आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है।
- उन्होंने सिर्फ एक साल पहले ही स्विमिंग शुरू की
- समर क्लास के दौरान पहली बार पूल में उतरीं
- परिवार ने उनके सपने को पूरा सपोर्ट किया
आधे आकार के पूल में की प्रैक्टिस
सपना जिस पूल में अभ्यास करती हैं, वह सिर्फ 25 मीटर लंबा है, जबकि नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताएं 50 मीटर के पूल में होती हैं।
रायपुर के इंटरनेशनल पूल में उन्हें ज्यादा प्रैक्टिस का मौका भी नहीं मिला। सिर्फ एक बार ही वह वहां अभ्यास कर सकीं।
कोच और सुविधाओं की चुनौती
कोच दीप्ती वर्मा के मार्गदर्शन में सपना ने सीमित संसाधनों के बावजूद नेशनल स्तर तक का सफर तय किया।
डाइट, ट्रेनिंग और सुविधाओं की कमी के बावजूद उनका प्रदर्शन प्रेरणादायक रहा।
निष्कर्ष
सपना कोरसा ने भले ही मेडल नहीं जीता, लेकिन अपने जज्बे, संघर्ष और हिम्मत से यह साबित कर दिया कि असली जीत हार में भी छिपी होती है।

