भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में शनिवार को 15वां वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 2023-25 बैच के 552 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और छात्रों को भविष्य के प्रति जिम्मेदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।

अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि आज के छात्र ऐसे दौर में स्नातक हो रहे हैं जब भारत जनसांख्यिकीय ऊर्जा, तकनीकी क्षमता और बढ़ती वैश्विक भागीदारी के अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने इसे अवसर और जिम्मेदारी दोनों का समय बताया और कहा कि युवा आने वाले समय में न केवल संस्थानों और उद्योगों को दिशा देंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी तय करेंगे।
उन्होंने युवाओं को लगातार सीखते रहने, मेहनत करने और रिश्तों को महत्व देने की सलाह दी। साथ ही स्पष्ट सोच और सही निर्णय क्षमता को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के पास तकनीक और जानकारी तक आसान पहुंच है, जिससे उनके अवसर पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं।
वैश्विक हालात को ‘स्ट्रक्चर्ड टर्बुलेंस’ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि बदलते शक्ति संतुलन, तकनीकी बदलाव और संसाधनों के पुनर्वितरण का संकेत है। ऐसे माहौल में देशों और कंपनियों के लिए जोखिम का संतुलन और विविधता बेहद जरूरी हो गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज की विदेश नीति सिर्फ कूटनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलने, तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में वैश्वीकरण का पुराना मॉडल बदल रहा है और आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ रहा है। भारत के लिए इसका मतलब है कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मजबूती लाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को ‘भाग्यशाली पीढ़ी’ बताते हुए वैश्विक समझ विकसित करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि आज करियर केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बनते हैं। युवाओं को ‘कैन-डू स्पिरिट’ के साथ आगे बढ़ने और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की सलाह दी।
अंत में उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे—जैसे हाईवे, रेल, पोर्ट और एयरपोर्ट—में निवेश कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भारत अब दुनिया की शीर्ष-5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आगे और भी बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।

