छत्तीसगढ़ में आवारा पशुओं के कारण बढ़ते सड़क हादसों और फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। शासन ने शपथपत्र के माध्यम से बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस समय 46 अस्थायी मवेशी शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं, जहां कुल 4,160 मवेशियों को सुरक्षित रखा गया है।
सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि आवारा पशुओं के स्थायी समाधान के लिए राज्य में 36 गौधामों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन गौधामों में मवेशियों के लिए शेड, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें से तीन गौधाम फिलहाल संचालित हो रहे हैं, जबकि आठ में मरम्मत और आवश्यक अधोसंरचना का कार्य जारी है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सरकार के जवाब के बाद इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की है।
सुनवाई के दौरान पशुधन विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी शेल्टर बनाए गए हैं। फसल कटाई के बाद मवेशियों को उनके मालिकों को सौंप दिया जाता है या इच्छुक ग्रामीणों में वितरित किया जाता है। बेलतरा और सुकुलकारी ग्राम पंचायतों में इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप गृह विभाग, एनएचएआई और सड़क सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
इसके अलावा, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के रजिस्ट्रार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पशु चिकित्सकों को गौधामों और शेल्टर होम का नियमित निरीक्षण कर पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और चारा-पानी की स्थिति की मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।



