रायपुर में गन लाइसेंस की होगी सख्त जांच, सभी लाइसेंसी हथियारों का होगा भौतिक सत्यापन

राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद गन लाइसेंस को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। पुलिस की अनुशंसा पर अब जिले में सभी लाइसेंसी हथियारों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। प्रशासन की ओर से यह पता लगाया जाएगा कि वर्तमान में कितने लोगों के पास वैध गन लाइसेंस है और उनके पास कितने हथियार मौजूद हैं।

इस जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि चुनाव के समय कितने लाइसेंसी हथियार पुलिस के पास जमा कराए जाते हैं। साथ ही ऐसे लोगों की भी पहचान की जाएगी जिन्होंने अपने गन लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है, लेकिन उनके पास अभी भी हथियार मौजूद हैं।

जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में करीब 13,242 लोगों को गन लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा रायपुर जिले में 1,927 लाइसेंस धारक हैं। वर्ष 2025 में जिले में 85 से अधिक लोगों ने नए गन लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन इनमें से केवल 25 लोगों को ही लाइसेंस जारी किया गया। गन लाइसेंस रखने वालों में नेता, ठेकेदार, सुरक्षा गार्ड, निशानेबाज खिलाड़ी और कारोबारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। हर महीने करीब 12 से 15 नए आवेदन भी मिल रहे हैं।

प्रशासन ने गन लाइसेंस से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अब डिजिटल कर दिया है। नए लाइसेंस के आवेदन के साथ-साथ लाइसेंस के नवीनीकरण, हथियारों के ट्रांसफर और स्टेट बढ़ाने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है। इसके लिए आवेदकों को केंद्र सरकार के पोर्टल https://www.ndal-alis.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा।

ऑनलाइन आवेदन के बाद जरूरत पड़ने पर आवेदक को दस्तावेजों की जांच के लिए एडीएम कार्यालय बुलाया जा सकता है। इसके बाद पुलिस टीम आवेदक के घर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी और पड़ोसियों से भी जानकारी लेगी। पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय जिला कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा कि लाइसेंस जारी किया जाए या नहीं।

एडीएम और नोडल अधिकारी उमाशंकर बांदे के अनुसार अब सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से समय की बचत होगी और फाइलों के गुम होने जैसी समस्याएं भी समाप्त होंगी। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से गन लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।

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