Indravati Tiger Reserve क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के शिकार का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें वन विभाग के ही एक डिप्टी रेंजर की संलिप्तता उजागर हुई है। आरोप है कि वह शिकारियों को वन्यजीवों की आवाजाही की गोपनीय जानकारी देता था, जिसके आधार पर गिरोह जंगल में जाल बिछाकर शिकार करता था।
जांच में सामने आया कि बाघ को नैमेड़ के जंगलों में और तेंदुए को Dantewada जिले के वन क्षेत्र में फंसाकर मारा गया। शिकार के बाद आरोपियों ने जानवरों का मांस काटकर वहीं पकाया और खाया। वन विभाग ने उनके कब्जे से बाघ और तेंदुए के नाखून समेत अन्य अवशेष बरामद किए हैं।
बताया जा रहा है कि यह गिरोह जानवरों की खाल, दांत और नाखूनों की तस्करी से भी जुड़ा हुआ था। मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार बताया जा रहा है।
आरोपियों की निशानदेही पर केशापुर इलाके में छापेमारी कर तेंदुए की एक खाल भी बरामद की गई, जिसके बाद दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इससे पहले बालूद मार्ग पर भी कुछ आरोपियों को बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया था।
वन अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का जल्द बड़ा खुलासा किया जाएगा और विभाग से जुड़े किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

