महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, साय सरकार बुलाएगी विशेष सत्रc

महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। विष्णुदेव साय की सरकार इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र इसी महीने आयोजित हो सकता है, जिसमें विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है।

रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रवैया निराशाजनक रहा है। इस रैली का आयोजन भाजपा महिला मोर्चा द्वारा किया गया था, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंची, जहां सभा आयोजित हुई।

विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया के तहत पहले राज्य कैबिनेट इसकी मंजूरी देती है, जिसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाता है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विधानसभा सत्र आयोजित किया जाता है।

महिला आरक्षण को लेकर भाजपा ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो 27 अप्रैल तक जारी रहेंगे। 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा।

इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विपक्ष के कारण पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ पार्टियां “फूट डालो और राज करो” की नीति पर काम कर रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी 21-22 प्रतिशत है।

वहीं, नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी राजनीति के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

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