छत्तीसगढ़ में मॉनसून अब विदाई की ओर है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों में राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो सकती है। सबसे पहले उत्तरी छत्तीसगढ़ यानी सरगुजा क्षेत्र से मानसून की विदाई की संभावना है।
हालांकि, मध्य और दक्षिणी जिलों में अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक जैसी गतिविधियाँ बनी रहेंगी। पिछले 24 घंटों में भी कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई — भिलाई (दुर्ग) में सबसे अधिक 58.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं, अधिकतम तापमान 32.02°C (दुर्ग) और न्यूनतम 19.6°C (पेंड्रारोड) रहा।

🔹 अक्टूबर में अब तक सामान्य से दोगुनी बारिश
इस साल अक्टूबर महीने में छत्तीसगढ़ में 109% अधिक वर्षा हुई है। आमतौर पर 8 अक्टूबर तक प्रदेश में औसतन 28.3 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक 59.1 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यत: प्रदेश में 30 सितंबर तक मानसून समाप्त हो जाता है, परंतु इस बार इसकी वापसी में लगभग 10 दिन की देरी हो रही है।
🔹 15 अक्टूबर के बाद होगी विदाई
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार छत्तीसगढ़ में मानसून की वापसी लगभग 15 अक्टूबर के बाद शुरू होगी। आमतौर पर सरगुजा से 5 अक्टूबर के आसपास इसकी वापसी होती है, लेकिन इस बार मौसम की परिस्थितियाँ सामान्य से धीमी हैं।
🔹 प्रदेश में बारिश के आंकड़े
अब तक राज्य में 1167.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है।
- बलरामपुर जिले में 1520.9 मिमी बारिश हुई — 52% अधिक
- बेमेतरा में 524.5 मिमी — 50% कम
- बस्तर, रायगढ़, राजनांदगांव जैसे जिलों में बारिश लगभग सामान्य रही।
(आंकड़े 30 सितंबर तक के हैं)
🔹 बिजली गिरने का विज्ञान
जब बादलों के भीतर पानी की बूंदें और बर्फ के कण आपस में रगड़ते हैं, तो उनमें इलेक्ट्रिकल चार्ज उत्पन्न होता है। इससे कुछ बादल पॉजिटिव और कुछ नेगेटिव चार्ज वाले बन जाते हैं।
इन विपरीत चार्ज वाले बादलों के टकराने से बिजली (lightning) पैदा होती है।
कभी-कभी यह चार्ज इतना शक्तिशाली होता है कि धरती तक पहुंच जाता है, और पेड़, पानी या धातु जैसे कंडक्टर इसके रास्ते बन जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति इनके पास हो, तो बिजली गिरने की चपेट में आ सकता है।

