मुआवजे में फर्जीवाड़ा रोकने नए नियम लागू: अब जमीन का हिसाब होगा हेक्टेयर में, डायवर्सन से कोई फर्क नहीं

राज्य सरकार ने मुआवजे में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बड़ा बदलाव किया है। अब जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा वर्गमीटर की बजाय हेक्टेयर में तय होगा।


🔹 डायवर्सन की गई या नहीं – मुआवजे में कोई अंतर नहीं

पहले डायवर्सन की गई जमीन का मुआवजा बिना डायवर्सन वाली जमीन की तुलना में ढाई गुना ज्यादा होता था। नए नियम के तहत डायवर्टेड और बिना डायवर्सन जमीन का मुआवजा बराबर होगा।


🔹 मुआवजा तय करने का तरीका

अधिग्रहण नियम के अनुसार:

  • जमीन 500 वर्गमीटर से कम होने पर मुआवजा ज्यादा मिलता था।
  • जमीन 500 वर्गमीटर से ज्यादा होने पर मुआवजा कम होता था।

उदाहरण:

  • एक एकड़ जमीन का मुआवजा 20 लाख है।
  • यदि जमीन को छोटे टुकड़ों में बांटा जाए और 500 वर्गमीटर से कम किया जाए, तो मुआवजा लगभग 1 करोड़ तक हो सकता था।
  • यह फायदा मुआवजा टैक्स फ्री होने के कारण और बढ़ जाता था।

🔹 नए नियम के फायदे

  • मुआवजा पारदर्शी होगा।
  • जमीन को टुकड़ों में बांटकर या डायवर्सन दिखाकर ज्यादा रकम नहीं ली जा सकेगी।
  • केंद्र और राज्य की भारतमाला और रेल परियोजनाओं में समय पर भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण आसान होगा।

🔹 मंत्री का बयान

ओपी चौधरी, वित्त और आवास एवं पर्यावरण मंत्री, छत्तीसगढ़:

“राज्यभर में मुआवजा पारदर्शी होगा और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यह नियम लागू किया गया है।”

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