छत्तीसगढ़ ने ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य अब देश का सबसे तेज़ डिजिटल परिवर्तन करने वाला राज्य बन गया है। केवल एक साल में ई-ऑफिस प्रणाली सचिवालय से लेकर तहसील और ब्लॉक स्तर तक पूरी तरह लागू हो चुकी है। अगले साल तक इसे गांवों तक भी पहुँचाया जाएगा।
ई-ऑफिस प्रणाली की मदद से हर फाइल की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है। अब किसी भी स्तर पर फाइल अटकने या विलंब होने का खतरा नहीं है। सभी अधिकारी और कर्मचारी फाइल की प्रगति देख सकते हैं। इस प्रणाली में किसी भी अधिकारी द्वारा की गई नोटिंग को बाद में बदला नहीं जा सकता। सभी डेटा को मल्टीपल सर्वर पर सुरक्षित रखा गया है, जिससे सर्वर फेल होने या तकनीकी समस्या आने पर भी डेटा सुरक्षित रहता है।
कागज से क्लाउड की ओर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ई-ऑफिस ने शासन में ई-गवर्नेंस को संपूर्ण डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। अब हर फाइल का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज को कागज से क्लाउड की दिशा में अग्रसर किया है। इससे पारदर्शिता, गति और विश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
अब एक ही दिन में निपट रही फाइलें
सचिवालय में लगभग 1.15 लाख फाइलें, विभागाध्यक्ष कार्यालयों में 73,969 फाइलें, और जिला कार्यालयों में 32,000 फाइलें अब ई-ऑफिस से संचालित हो चुकी हैं। ई-ऑफिस लागू होने के बाद फाइलों के निपटान का औसत समय हफ्तों से घटकर केवल एक दिन रह गया है। फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।
इस बदलाव से डीज़ल और वाहन खर्च में बचत हुई है और समय का अधिकतम उपयोग संभव हो पाया है। अब वह फाइल जो पहले हफ्तों में निपटती थी, अब एक ही दिन में निपट जाती है। साथ ही, ऑटो-अप्रूवल मैकेनिज़्म की सुविधा के चलते रूटीन फाइलें स्वचालित रूप से अप्रूव हो जाती हैं।

