छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना घोटाला: किसानों को डराकर जमीन अपने नाम कराई, 32 करोड़ का मुआवजा फर्जीवाड़े से बांटा

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना घोटाला मामले में EOW (Economic Offences Wing) ने बड़े खुलासे किए हैं। एजेंसी की चार्जशीट में दावा किया गया है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों और दलालों ने मिलकर किसानों की जमीन पर अवैध मुआवजा हड़पने के लिए सिंडिकेट बनाया


🏞️ किसानों के साथ ठगी का तरीका

  • दलालों ने किसानों से संपर्क कर बताया कि उनके राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियां हैं, नामांतरण अधूरा है और सीमांकन नहीं हुआ है, इसलिए मुआवजा नहीं मिलेगा।
  • झांसे में आकर किसानों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए।
  • दलालों ने दावा किया कि उनके पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम से अच्छे संबंध हैं और वे किसानों को अधिक मुआवजा दिला सकते हैं।

💰 32 करोड़ का फर्जीवाड़ा

  • उमा तिवारी की फर्जी जमीन दिखाकर केदार तिवारी, हरमीत खनूजा और विजय जैन ने 2.13 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया और आपस में बांट लिया।
  • नवा रायपुर के नायकबांधा, उरला और टोकरो की जमीनों के लिए बैकडेट दस्तावेज बनाकर 26.79 करोड़ रुपए मुआवजा लिया गया।
  • नायकबांधा डैम की जमीन को दोबारा भारतमाला परियोजना में अधिग्रहित दिखाकर 2.34 करोड़ रुपए का मुआवजा दोबारा लिया गया।

📝 फर्जी दस्तावेज और खातों का खेल

  • हरमीत खनूजा की पत्नी तहसीलदार हैं। हरमीत ने विजय जैन, खेमराज कोसले और केदार तिवारी के साथ मिलकर फर्जी बंटवारा, नामांतरण, ब्लैंक चेक और RTGS फार्म पर हस्ताक्षर कराए।
  • ICICI बैंक, महासमुंद में खाते खोलकर मुआवजे का पैसा कई निजी संस्थाओं में जमा किया और फिर निकालकर आपस में बांट लिया गया।

👮‍♂️ जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका

  • EOW एसडीएम निर्भय साहू, RI रोशन लाल वर्मा, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती घृतलहरे, दिनेश पटेल और लेखराम देवांगन की भूमिका की जांच कर रही है।
  • इन सभी को नोटिस जारी किया गया है, फिलहाल वे फरार हैं।

⚠️ घोटाले के तीन तरीके

  1. दोबारा मुआवजा जारी करना – पहले से मुआवजा मिले जमीन के लिए फिर से पैसा लिया गया।
  2. बैकडेट विभाजन – 2019 से पहले खाता विभाजन दिखाकर अधिक मुआवजा दिलाया गया।
  3. अधिक मुआवजा दिलाने के लिए अधिकारियों को मनाना – दलालों ने अधिकारियों को प्रभावित कर किसानों को ज्यादा मुआवजा दिलवाया और अपने हिस्से के करोड़ों रुपए हड़प लिए।
  • हरमीत सिंह और परिवार को करीब 23 करोड़ रुपए मिले।
  • जैतूसाव मठ की जमीन भी फर्जी ढंग से उमा तिवारी के नाम कर मुआवजा लिया गया।

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