
नई दिल्ली:
वक्फ (संशोधन) विधेयक, जिसे संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है, मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाएगा और वक्फ प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को एनडीटीवी से बातचीत में यह बात कही।
प्रसाद ने स्पष्ट किया कि इस कानून से किसी मस्जिद, धार्मिक स्थल या कब्रिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मुद्दा सीधा है—यह सुनिश्चित करना कि ‘वक़ीफ़’ (दानदाता) की मूल भावना का पालन ‘मुतवल्ली’ (प्रबंधक) द्वारा किया जा रहा है या नहीं। वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि एक कानूनी व्यवस्था है। मुतवल्ली सिर्फ एक संरक्षक है, मालिक नहीं, क्योंकि संपत्ति अल्लाह के नाम हो जाती है।” उन्होंने कहा कि यह बिल विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं और वंचित तबकों को लाभ पहुंचाएगा।
वक्फ ज़मीनों के दुरुपयोग पर सवाल
प्रसाद ने पटना के डाक बंगला क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ वक्फ ज़मीनों पर पाँच सितारा होटल और शोरूम बन गए हैं। उन्होंने कहा, “भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा वक्फ संपत्तियाँ हैं, लेकिन कितने अस्पताल, विश्वविद्यालय या प्रशिक्षण केंद्र बने हैं? सवाल यह है कि क्या प्रबंधक दानदाता की मंशा के अनुसार संपत्ति का उपयोग कर रहे हैं या अपनी जेब भर रहे हैं?”
उन्होंने बताया कि संशोधित कानून डिजिटलीकरण और सार्वजनिक रिकॉर्ड के ज़रिए पारदर्शिता लाएगा। “अब सभी जानकारियाँ ऑनलाइन उपलब्ध होंगी—संपत्ति कहाँ है, मुतवल्ली कौन है, और संपत्ति का उपयोग कैसे हो रहा है। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी,” प्रसाद ने कहा।
राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रिया
जब मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया या बिहार विधानसभा चुनाव पर इसके प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो प्रसाद ने चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, “1984 में बीजेपी के पास दो सीटें थीं, आज हम पूरे देश और 21 से अधिक राज्यों में सरकार चला रहे हैं। नीतीश कुमार जी, हमारे सहयोगी, 19 साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं।”
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी मुसलमान की नागरिकता छीनी नहीं गई। प्रसाद ने कहा, “राजनीति बदल चुकी है। पुराने नैरेटिव अब काम नहीं करते। अल्पसंख्यक समुदाय के युवा भी विकास चाहते हैं। कुछ लोग पुराने ढर्रे पर चलकर इस बदलाव को रोकना चाहते हैं, लेकिन भारत आगे बढ़ चुका है।”


