छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार दोपहर एक बड़ा रेल हादसा हो गया। कोरबा से बिलासपुर आ रही एक मेमू लोकल ट्रेन ने लालखदान स्टेशन के पास खड़ी मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मेमू ट्रेन का इंजन मालगाड़ी के कोयले से लदे वैगन पर चढ़ गया। इस भीषण दुर्घटना में लोको पायलट समेत 11 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 25 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि हादसे की वजह ऑटो सिग्नल फेल्योर या सिग्नल ओवरशूट हो सकती है। हालांकि रेलवे ने कहा है कि इसकी पुष्टि सीआरएस (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) की जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी।

200 यात्रियों में मचा हड़कंप, कई बोगियां क्षतिग्रस्त
घटना के वक्त ट्रेन में लगभग 200 यात्री सवार थे। मेमू करीब 50 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। टक्कर लगते ही बोगियों में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शी नरेंद्र मौर्य ने बताया, “जोरदार धमाका हुआ तो हम घर से बाहर निकले। ट्रेन के पास पहुंचे तो यात्री घायल हालत में चिल्ला रहे थे। हमने घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस में भेजा।”
सीएम ने जताया दुख, राहत राशि का ऐलान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे को दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
वहीं, रेलवे मंत्रालय ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख और सामान्य रूप से घायल यात्रियों को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।
कवच सिस्टम की कमी पर उठे सवाल
हादसे के बाद रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। देश में 15 हजार से ज्यादा इंजनों में से केवल 1,290 इंजनों में यह सिस्टम लगाया गया है, जबकि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन में किसी भी इंजन में यह नहीं है।
कवच सिस्टम ट्रेन की गति नियंत्रित कर टक्कर जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करता है। इसे स्थापित करने की लागत करीब 80 से 90 लाख रुपए प्रति इंजन है।
क्या है कवच सिस्टम?
कवच एक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम (ATP) है जो ट्रेन की गति सीमा और लोको पायलट की त्रुटियों पर स्वतः ब्रेक लगाता है। इससे ट्रेनें सिग्नल पार करने से पहले रुक जाती हैं और संभावित टक्कर से बचाव होता है।
जांच शुरू, सिग्नल फेल या ओवरशूट – कारण की पुष्टि बाकी
रेलवे के सीपीआरओ डॉ. सुष्कर विपुल विलास राव ने कहा कि हादसे की वजह की जांच कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी बीके मिश्रा करेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुर्घटना सिग्नल सिस्टम फेल या लोको पायलट की ओर से सिग्नल ओवरशूट की वजह से हो सकती है।

