बिलासपुर नगर निगम का बजट पिछले आठ वर्षों में लगातार बढ़ते हुए 1300 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, लेकिन इसके बावजूद शहर में कई अहम विकास कार्य अब तक अधूरे हैं। वर्ष 2018-19 में निगम का बजट 776 करोड़ था, जो धीरे-धीरे बढ़कर वर्तमान स्तर तक पहुंच गया, मगर योजनाएं अब भी फाइलों में अटकी हुई हैं।
हर साल नए वादे और घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन पुराने प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाते। कई योजनाएं ऐसी हैं, जिन्हें हर बजट में दोहराया जाता है, फिर भी उनका काम शुरू नहीं हो पाता या अधूरा रह जाता है। नगरोत्थान योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 60 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अधिकांश कार्य अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। जिन 17 ग्राम पंचायतों को निगम में शामिल किया गया, वहां आज भी बिजली, पानी, सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
पिछले वर्षों में घोषित कई प्रमुख प्रोजेक्ट जैसे अशोक नगर से बिरकोना रोड चौड़ीकरण, अरपा इंदिरा सेतु से राम सेतु तक अटल पथ निर्माण, मंगला चौक से आजाद चौक तक सड़क निर्माण और बाहरी क्षेत्रों के विकास कार्य अब तक अधूरे हैं। अमेरी में 50 एकड़ जमीन पर स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की योजना फंड की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। महिलाओं के लिए 750 सीटों वाला प्रशिक्षण केंद्र भी अभी तक शुरू नहीं हो सका। इसके अलावा 2 करोड़ रुपये की लागत से बने अर्बन कॉटेज और सर्विस इंडस्ट्रीज पार्क का भी सही उपयोग नहीं हो पाया है।

इस बार के बजट में शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है। छात्रों के लिए फ्री वाई-फाई सुविधा शुरू करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने की योजना बनाई गई है। छात्राओं के लिए मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा मिले। खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मंगला क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम निर्माण हेतु जमीन देने पर सहमति बनी है।
महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर जोन में पिंक टॉयलेट और पिंक गार्डन विकसित करने की योजना शामिल की गई है। साथ ही शहर को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट वेंडिंग जोन और फूड स्ट्रीट विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे छोटे व्यापारियों और युवाओं को नए अवसर मिल सकें।
बजट को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। सभापति विनोद सोनी का कहना है कि इस बजट से शहर के विकास को गति मिलेगी और अधूरे कार्य पूरे किए जाएंगे। वहीं विपक्ष की पार्षद शहजादी कुरैशी ने आरोप लगाया कि बजट में केवल राशि बढ़ाकर पुराने प्रस्तावों को दोबारा पेश किया गया है, लेकिन जमीन पर कोई खास काम नहीं दिख रहा।
मेयर पूजा विधानी का कहना है कि बजट का उद्देश्य शहरवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सड़कों का डामरीकरण, डिवाइडर का सौंदर्यीकरण, पिंक टॉयलेट और पिंक गार्डन जैसी योजनाएं इसी दिशा में हैं। साथ ही निगम में शामिल गांवों के विकास के लिए प्रत्येक को 5-5 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया है, ताकि जलभराव, नाली और अन्य समस्याओं का समाधान किया जा सके।

