9 साल की बच्ची की आंख से दिमाग तक घुसी घंटी: रायपुर डीकेएस अस्पताल में 4 घंटे चला ऑपरेशन, डॉक्टरों ने बचाई आंख और जान

रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने दिवाली की रात एक चमत्कारिक सर्जरी की। बिलासपुर की 9 साल की काव्या की आंख से होते हुए दिमाग तक घुसी घंटी का हैंडल डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक निकालकर न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसकी आंख की रोशनी भी बरकरार रखी।

घटना बिलासपुर के सिविल लाइन इलाके की है। दिवाली के दिन खेलते-खेलते काव्या मुंह के बल गिर गई। जिस घंटी से वह खेल रही थी, उसका ऊपरी सिरा बाईं आंख में घुसकर सीधा दिमाग तक जा पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत सिम्स बिलासपुर ले गए।

जांच में पता चला कि घंटी की नुकीली नोक आंख की हड्डी पार कर दिमाग में लगभग 5 सेंटीमीटर तक फंसी हुई है। स्थिति गंभीर थी, इसलिए डॉक्टरों ने तुरंत रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर कर दिया।

दिवाली की रात इमरजेंसी में न्यूरोसर्जन डॉ. राजीव साहू और उनकी टीम—डॉ. लवलेश राठौड़, डॉ. नमन चंद्राकर, डॉ. प्रांजल मिश्रा और डॉ. देवश्री—ने 4 घंटे तक चले ऑपरेशन में बच्ची को बचाने की जद्दोजहद की।

ऑपरेशन एंडोस्कोपिक तकनीक से किया गया ताकि दिमाग के ऊत्तकों को नुकसान न पहुंचे। भौंह के ऊपर से छोटा चीरा लगाकर डॉक्टरों ने धीरे-धीरे घंटी का हिस्सा बाहर निकाला। सर्जरी के बाद जब बच्ची ने दोनों आंखों से साफ देखा और मुस्कुराई, तो ओटी में मौजूद सभी डॉक्टरों ने राहत की सांस ली।

डॉक्टरों के अनुसार, यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला केस है, जिसमें आंख के रास्ते दिमाग तक घुसे मेटल ऑब्जेक्ट को सफलतापूर्वक निकाला गया। बच्ची फिलहाल सुरक्षित है और अस्पताल में निगरानी में है।

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