20 साल से अटका शारदा चौक-तात्यापारा प्रोजेक्ट: फ्लाईओवर की घोषणा के 41 दिन बाद भी एजेंसी तय नहीं

रायपुर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल शारदा चौक से तात्यापारा चौक तक सड़क चौड़ीकरण का मामला पिछले 20 वर्षों से लंबित है। 24 फरवरी को विधानसभा में पेश बजट में इस मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी। हालांकि 41 दिन बीत जाने के बाद भी निर्माण के लिए किसी एजेंसी का चयन नहीं हो पाया है, जिससे परियोजना एक बार फिर अनिश्चितता में फंस गई है।

मामले की पड़ताल में सामने आया है कि प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग दोनों ही स्पष्ट जिम्मेदारी लेने से पीछे हट रहे हैं। दोनों विभागों का कहना है कि शासन स्तर पर अभी तक एजेंसी तय नहीं की गई है। इसी वजह से वर्षों से लंबित सड़क चौड़ीकरण और हाल ही में घोषित फ्लाईओवर फिलहाल कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं।

इस बीच रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखी गई चिट्ठी के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। सांसद ने अपने पत्र में सवाल उठाया है कि जब पहले ही शहर के विधायकों और महापौर की बैठक में सड़क चौड़ीकरण पर सहमति बन चुकी थी, तो बजट में अचानक फ्लाईओवर का प्रावधान कैसे जोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर शहरवासियों में असंतोष और नाराजगी है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नगरीय निकाय चुनाव 2025 के दौरान जारी ‘अटल विश्वास पत्र’ में तात्यापारा-शारदा चौक सड़क चौड़ीकरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का वादा किया गया था। इसके अलावा विधानसभा में भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

करीब दो साल पहले नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार इस चौड़ीकरण परियोजना की जद में लगभग 102 दुकानें और मकान आते हैं। उस समय जमीन अधिग्रहण के लिए करीब 122 करोड़ रुपये मुआवजे का अनुमान लगाया गया था, जबकि सड़क निर्माण की लागत 12 से 15 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी। अब नई गाइडलाइन दर लागू होने के कारण इस परियोजना की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि पहले दी गई 30 प्रतिशत की छूट अब समाप्त हो चुकी है।

यह मार्ग शहर के सबसे व्यस्त रूट्स में से एक है, जहां से रोजाना करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। सुबह और शाम के समय यहां 15 से 20 मिनट तक जाम की स्थिति बनी रहती है, जिसका असर आसपास की सड़कों पर भी पड़ता है।

इधर, विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर नगर सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि महापौर ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बाद भी बजट में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि फ्लाईओवर बनाया जाता है तो इससे प्रभावित लोगों पर दोहरी मार पड़ेगी।

वहीं अधिकारियों के बीच भी जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पीडब्ल्यूडी के सीई एसके कोरी का कहना है कि यह परियोजना उनके बजट में शामिल नहीं है, इसलिए निर्माण एजेंसी को लेकर उनके पास कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर नगर निगम आयुक्त विश्वेश कुमार का कहना है कि फ्लाईओवर का निर्माण पीडब्ल्यूडी को करना है और वे इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करेंगे।

कुल मिलाकर, शहर के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम लोगों को ट्रैफिक समस्या से राहत मिलने में और देरी हो सकती है।

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