रायपुर में बढ़ती गर्मी के साथ कारों में आग लगने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं। पिछले एक महीने में 6 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें चलती और खड़ी दोनों तरह की गाड़ियां अचानक आग की चपेट में आ गईं। राहत की बात यह है कि इन हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
हाल के प्रमुख हादसे
- रिंग रोड-2 पर चलती टाटा एस में आग, ड्राइवर ने कूदकर जान बचाई
- कलेक्ट्रेट के पास खड़ी कार में अचानक आग
- खमतराई में चलती स्कॉर्पियो में आग, 4 लोग सुरक्षित निकले
- अवंति विहार में खड़ी कार आग का गोला बनी

क्या है आग लगने की वजह?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में कार के अंदर का तापमान 60°C तक पहुंच सकता है। इससे इंजन, वायरिंग और फ्यूल सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।
मुख्य कारण:
- ओवरहीटिंग
- फ्यूल लीकेज
- इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट
- खराब या पुरानी वायरिंग
- कार में ज्वलनशील सामान रखना
- समय पर सर्विसिंग न कराना (सबसे बड़ी वजह)
एक्सपर्ट की चेतावनी
स्थानीय ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर मामलों में लापरवाही ही इन घटनाओं की जड़ है। छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं को नजरअंदाज करना बड़े हादसे में बदल सकता है।
कैसे करें बचाव?
- नियमित रूप से गाड़ी की सर्विसिंग कराएं
- कूलिंग सिस्टम और इंजन की जांच कराएं
- वायरिंग और बैटरी की समय-समय पर जांच
- कार में परफ्यूम, लाइटर, गैस सिलेंडर जैसी ज्वलनशील चीजें न रखें
- ज्यादा गर्मी में गाड़ी को सीधे धूप में लंबे समय तक खड़ा न करें
- फायर एक्सटिंग्विशर रखना बेहतर विकल्प
पुरानी गाड़ियों को लेकर नियम
सरकार के नियमों के अनुसार:
- 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां कुछ क्षेत्रों में प्रतिबंधित हैं
- 20 साल पुरानी निजी और 15 साल पुरानी कॉमर्शियल गाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट जरूरी है
- फेल होने पर वाहन को स्क्रैप किया जा सकता है
CNG और इलेक्ट्रिक कार पर क्या खतरा ज्यादा?
अगर CNG किट गलत तरीके से लगाई गई हो या मेंटेनेंस सही न हो, तो खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमित जांच कराई जाए तो CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने का जोखिम काफी कम रहता है।
गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान बन सकती है। समय पर मेंटेनेंस और सावधानी ही आपकी और आपके वाहन की सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।

