रायपुर के राजीव और नैना पटले सात साल की शादी के बाद भी संतान सुख से वंचित रहे। इसके बावजूद उन्होंने दूसरों के बच्चों की जिंदगी को रोशन करने का निर्णय लिया। अब यह दंपती उन बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिनकी मांएं घरों में काम करती हैं या दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। वर्तमान में वे करीब 70 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
अकेली मांएं अपने बच्चों को सुबह दंपती के पास छोड़ आती हैं। जो माता-पिता सक्षम हैं, वे फीस देते हैं; जो नहीं दे सकते, उनके लिए शिक्षा निःशुल्क है। शुरू में यह कोचिंग सेंटर था, लेकिन अब यह डे-बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधा बन गई है।
पड़ोसी का सहयोग
पटले दंपती को उनकी पड़ोसी रेखा केशरवानी ने अपना खाली घर नि:शुल्क दे दिया। उन्होंने कहा कि यह बच्चों को यह महसूस कराने के लिए है कि वे असली स्कूल में पढ़ रहे हैं।
फीस का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों के लिए
राजीव (MBA) और नैना (MA) ने बताया कि उनका इलेक्ट्रिक पंप का बिजनेस 2017-2019 में बंद हो गया। कोविड के दौरान उन्होंने मोहल्ले के बच्चों की पढ़ाई शुरू की। संपन्न परिवारों से मिली फीस से उनका खर्च चलता है और बाकी जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपियां, बैग और ड्रेस खरीदी जाती हैं।
व्यक्तिगत संघर्ष और शिक्षा की जिम्मेदारी
डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में राजीव की मृत्यु हो गई। नंदिनी राव और अन्य माता-पिता अब बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के लिए दंपती पर भरोसा करते हैं। नैना मैम ने जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की पढ़ाई को सुनिश्चित किया।
माँ पद्मिनी यादव ने बताया कि उनकी बेटी गीत और बेटा योग अच्छे अंक ला रहे हैं। दूसरी मां नंदिनी राव कहती हैं कि उनके बच्चों को पहले पिता ने लावारिस छोड़ दिया था, लेकिन अब वे सुरक्षित और पढ़ाई में ध्यान दे रहे हैं।

