छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में घरों तक प्राकृतिक गैस (पीएनजी) पाइपलाइन पहुंचाने के प्रोजेक्ट में लंबे समय से आ रही अड़चनों को राज्य सरकार ने समाप्त करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सभी कलेक्टरों और संबंधित निकायों को केंद्र सरकार के ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026’ का पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं।
अब पाइपलाइन बिछाने की अनुमति अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोकी जाएगी। सड़क खुदाई और तकनीकी अनुमतियों के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है। निजी या गैर-सरकारी भूमि पर पाइपलाइन के लिए मुआवजे की दरें स्पष्ट कर दी गई हैं। व्यावसायिक भूमि पर प्रचलित सर्कल रेट का 30% भुगतान अनिवार्य होगा, और यदि 24 घंटे के भीतर अनुमति दी जाती है, तो अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी है।
पीएनजी कनेक्शन मिलने से नागरिकों को एलपीजी सिलेंडर की तुलना में 20-30% सस्ती गैस, घर पर मीटर आधारित सप्लाई और रिफिलिंग के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
पिछड़ी मंजूरी प्रक्रिया का समाधान
पहले स्थानीय प्रशासन और विभिन्न विभागों (जैसे लोक निर्माण विभाग, नगर निगम) से अनुमतियां न मिलने के कारण पाइपलाइन का काम अधर में अटका हुआ था। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि भूमिगत पाइपलाइन अधिनियम 2004 के तहत सभी अनुमतियां तुरंत दी जाएंगी। इससे पाइपलाइन बिछाने का काम जल्द पूरा होगा और नागरिकों को कनेक्शन मिल सकेगा।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लिए 5 प्रमुख निर्णय
- समितियों का गठन: राज्य और जिला स्तर पर योजना की निगरानी और समीक्षा के लिए समितियों का गठन।
- टास्क फोर्स: अनुमति और अनुमोदन में तेजी लाने के लिए संबंधित विभागों का संयुक्त ‘राज्य स्तरीय टास्क फोर्स’।
- सिंगल विंडो सिस्टम: आवेदन समय-सीमा में निपटाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार।
- प्रगति रिपोर्ट: सभी कलेक्टर और विभाग मासिक प्रगति रिपोर्ट खाद्य विभाग को भेजेंगे।
- प्रचार-प्रसार: योजना की जागरूकता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों के माध्यम से प्रचार।
राज्य सरकार ने सभी विभागों, कलेक्टरों और निकायों को निर्देश दिए हैं कि सिटी गैस वितरण योजना को जल्द से जल्द लागू किया जाए और पाइपलाइन बिछाने में किसी तरह की बाधा न आए।

