छत्तीसगढ़ में मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी रिश्तेदार को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने उसे जीवनभर के लिए कारावास (मृत्यु तक) की सजा दी है। यह मामला वर्ष 2020 का है, जब युवती घर में अकेली थी और आरोपी ने घर में घुसकर अपराध को अंजाम दिया था।
घटना बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र की है। पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए उसने घटना के बाद अपनी मां को इशारों के माध्यम से पूरी बात बताई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी नीलम कुमार देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया।

अदालत में बयान दर्ज करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि पीड़िता जन्म से ही मूक-बधिर है। सुनवाई के दौरान साइन लैंग्वेज विशेषज्ञ की सहायता ली गई। जब कुछ तथ्यों को समझाने में कठिनाई हुई, तो कोर्ट ने एक प्लास्टिक की गुड़िया उपलब्ध कराई। पीड़िता ने उसी के जरिए संकेतों में बताया कि उसके साथ क्या हुआ था।
ट्रायल कोर्ट ने इस गवाही को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को पहले ही सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि केवल किसी व्यक्ति के मूक-बधिर होने से उसकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के जरिए दी गई जानकारी भी कानून की नजर में मौखिक साक्ष्य मानी जाती है। साथ ही मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी अपराध की पुष्टि की। जांच में पीड़िता और आरोपी से जुड़े नमूनों में मानव शुक्राणु मिलने की बात सामने आई थी, जिसका आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

हाईकोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) के तहत मृत्यु तक आजीवन कारावास और धारा 450 के तहत अतिरिक्त पांच वर्ष की सजा सुनाई है। इसके अलावा उस पर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी फिलहाल जेल में बंद है और उसे पूरी सजा भुगतनी होगी। c

