CG 12वीं बोर्ड पेपर लीक का सच: एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर वायरल हुआ प्रश्नपत्र

छत्तीसगढ़ 12वीं बोर्ड के हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आया है। दावा है कि परीक्षा शुरू होने से करीब 10 घंटे पहले ही प्रश्नपत्र टेलीग्राम पर शेयर हो गया था। 13 मार्च की रात लगभग 11 बजे एक टेलीग्राम ग्रुप में “CG Board 2026 Real Question Paper” लिखी इमेज पोस्ट की गई, जिसे कुछ ही मिनटों में हजारों छात्रों ने डाउनलोड कर लिया।

बताया जा रहा है कि इस इमेज में हाथ से लिखे 15 सवाल थे और पहले पेज पर “B” सेट अंकित था। हैरानी की बात यह है कि 14 मार्च सुबह 9 बजे शुरू हुए हिंदी के प्रश्नपत्र के सेट B में वही सवाल उसी क्रम में पूछे गए, यहां तक कि वैकल्पिक प्रश्न भी मेल खाते थे।


🔍 कई जिलों तक फैला मामला

जांच में सामने आया कि केवल हिंदी ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी और अन्य विषयों के प्रश्न भी इसी तरह कई ग्रुप्स में शेयर किए गए थे। यह मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं, बल्कि कई जगहों पर एक साथ फैल गया।


📱 कैसे फैला लीक पेपर — 4 चरणों में समझें

▪️ पहला चरण:
रायपुर की एक निजी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे इंजीनियरिंग छात्र (बदला हुआ नाम) को टेलीग्राम ग्रुप में रात करीब 11 बजे पेपर मिला। उसने इसे सेव कर अपनी दोस्त को भेज दिया।

▪️ दूसरा चरण:
उस छात्रा ने इसे “इंपोर्टेंट क्वेश्चन” समझकर अपने दोस्तों को भेजा। आमतौर पर ऐसे मॉडल पेपर आते रहते हैं, लेकिन इस बार वही सवाल असली परीक्षा में आ गए।

▪️ तीसरा चरण:
एक छात्र ने यह पेपर कोरबा स्थित एक कोचिंग ग्रुप के व्हाट्सएप में शेयर कर दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।

▪️ चौथा चरण:
एक छात्र नेता को इंस्टाग्राम के जरिए मामले की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इसे सार्वजनिक किया और विरोध प्रदर्शन भी हुआ।


🚨 पुलिस जांच शुरू

बोर्ड को घटना की जानकारी परीक्षा के दो दिन बाद मिली, जिसके बाद सिविल और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस अब टेलीग्राम चैनलों और चैट्स की जांच कर रही है।


⚠️ पेपर रद्द होने की आशंका

बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि यदि लीक की पुष्टि होती है, तो परीक्षा रद्द भी की जा सकती है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कोई घोषणा नहीं हुई है।


🧠 जांच में चुनौती

अधिकतर छात्रों ने डर के कारण अपने मोबाइल से चैट्स और ग्रुप्स डिलीट कर दिए हैं। केवल स्क्रीनशॉट ही बचे हैं, जिससे मुख्य आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। साइबर पुलिस को ओरिजनल डेटा रिकवर करने में समय लग सकता है।

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