जगदलपुर, छत्तीसगढ़: जगदलपुर रेलवे कॉलोनी में रेलवे प्रशासन ने लगभग 32 मकानों को ढहा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह जमीन रेलवे की है और यहां लोग अवैध तरीके से मकान बना कर रह रहे थे। पहले नोटिस देकर खाली करने को कहा गया था, लेकिन जब पालन नहीं हुआ तो दिवाली से पहले कार्रवाई कर दी गई।

रहवासियों का दावा: कोई नोटिस नहीं मिला
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। कई लोग घर से बाहर थे जब बुलडोजर चला। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि अब वे कहां रहेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने नगर निगम को टैक्स और पानी बिल का भुगतान किया था, फिर भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद इलाके में सियासी तनाव भी बढ़ गया है। कांग्रेस और भाजपा के नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य और पार्षद कोमल सेना मौके पर पहुंचे और बिना सूचना लिए हुए इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले 50 से अधिक परिवार बेघर हो गए।
रेलवे अधिकारियों का बयान
एडीएम नागा पसर ने कहा कि यह जमीन रेलवे की संपत्ति है और यहां अवैध मकान बनाए गए थे। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीने से नोटिस जारी किए जा रहे थे और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अतिक्रमण हटाया गया। कार्रवाई शुरू में 2 अक्टूबर के लिए तय थी, लेकिन दशहरा के कारण स्थगित की गई। 11 अक्टूबर को यह अभियान दोबारा शुरू हुआ।

स्थानीय पार्षद ने जताई चिंता
वार्ड पार्षद कोमल सेना ने अधिकारियों की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने अनुरोध किया था कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान मिलने तक समय दिया जाए, लेकिन अधिकारियों ने नहीं माना और सभी मकानों को तोड़ दिया।
अस्थायी राहत
महापौर संजय पांडेय ने कहा कि DRM से बात करके बाकी मकानों के लिए दिवाली तक का समय दिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि प्रभावित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ले सकें, ताकि आगे की कार्रवाई से पहले उनके लिए ठोस व्यवस्था हो सके।

