बिरगांव (रायपुर)। छत्तीसगढ़ की राजधानी से सटे बिरगांव क्षेत्र में मिनी आंगनबाड़ियों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वार्डों में संचालित अधिकांश मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे छोटे बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, बिरगांव के हर वार्ड में न्यूनतम 3 से 4 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। प्रत्येक केंद्र में 0 से 3 वर्ष के करीब 20 बच्चे और 3 से 6 वर्ष तक के 25 से 30 बच्चे नियमित रूप से आते हैं। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र में गर्भवती महिलाओं की संख्या भी 8 से 14 के बीच होती है। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इन केंद्रों में न तो बच्चों के लिए पर्याप्त स्थान है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा।
300 वर्गमीटर के मानक की जगह सिर्फ 150-200 वर्गफुट में चल रही हैं आंगनबाड़ियां
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार, एक मिनी आंगनबाड़ी केंद्र का कुल क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर होना चाहिए, जिसमें एक कमरा, बरामदा, खेल का मैदान और शौचालय होना अनिवार्य है। लेकिन बिरगांव के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ 150 से 200 वर्गफुट क्षेत्रफल में ही संचालित हो रहे हैं।

बच्चों को खुले में शौच जाने की मजबूरी
सबसे गंभीर समस्या इन केंद्रों में शौचालय की अनुपस्थिति है। बच्चों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है, जिससे उनकी स्वच्छता और स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में सीखी गई आदतें ही भविष्य में व्यवहार बनती हैं। ऐसे में स्वच्छता की बुनियादी शिक्षा और संसाधनों का अभाव बच्चों की जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है।
केंद्रों की जमीनी हकीकत
- वार्ड क्रमांक 35, आचोली – केंद्र क्रमांक 1:
22 बच्चे और 8 गर्भवती महिलाएं हैं। केंद्र का क्षेत्रफल केवल 150 वर्गफुट है, न शौचालय है और न ही खेलने की पर्याप्त जगह। - वार्ड क्रमांक 35, आचोली – केंद्र क्रमांक 2:
यहां 0 से 6 वर्ष तक के कुल 70 बच्चे हैं, जिनमें से प्रतिदिन औसतन 30 बच्चे आते हैं। 12 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। क्षेत्रफल 150 वर्गफुट है और यहां भी शौचालय नहीं है। - वार्ड क्रमांक 30, केंद्र क्रमांक 25:
इस केंद्र में 0 से 3 वर्ष तक के 40 और 3 से 6 वर्ष तक के 20 बच्चे हैं, साथ ही 14 गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। लेकिन शौचालय की सुविधा नहीं है और बच्चों को पढ़ाई व खेल दोनों एक ही छोटे कमरे में करना पड़ता है।
पोषण की व्यवस्था बेहतर, लेकिन जगह और स्वच्छता चिंता का विषय
सभी केंद्रों में पोषण योजना के तहत बच्चों को Ready-to-Eat नाश्ता और दोपहर में दाल-चावल, सब्जी, रोटी जैसे भोजन नियमित रूप से दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को भी पोषक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन केंद्र की सीमित जगह में भोजन बनाना, बच्चों की पढ़ाई और खेल गतिविधियां सब कुछ एक ही स्थान पर करना पड़ता है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।

जिम्मेदारों से जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि केंद्रों की भौतिक स्थिति का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और पर्याप्त स्थान जरूरी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक केंद्र में शौचालय की सुविधा हो और बच्चों को साफ-सुथरा माहौल मिले।

यह मुद्दा न केवल बाल विकास बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा से भी जुड़ा है। प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों को इस पर त्वरित और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।



