रायपुर में साइबर ठगी के मामलों को रोकने के लिए पुलिस ने बैंक अधिकारियों के साथ विशेष बैठक की। इस बैठक का नेतृत्व एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने किया, जिसमें शहर के सभी प्रमुख बैंक लीड मैनेजर और लीगल हेड अधिकारी मौजूद थे। बैठक में साइबर ठगी रोकने के लिए 12 अहम बिंदुओं पर चर्चा की गई।
🔹 बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी
बैठक में शामिल थे: CSP आजाद चौक ईशु अग्रवाल, DSP क्राइम संजय सिंह, CSP कोतवाली केशरी नंदन नायक, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन रमाकांत साहू, उप पुलिस अधीक्षक नरेश पटेल, निशिथ अग्रवाल, लीड बैंक मैनेजर मोफिज मोहम्मद सहित रायपुर के विभिन्न बैंक अधिकारियों के लीगल हेड।

🔹 साइबर ठगी रोकने के लिए मुख्य निर्देश
- ऑनलाइन ठगी के शिकार को दूसरे बैंक में भेजने के बजाय टोल-फ्री नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करने के लिए प्रेरित करें।
- बार-बार खाता खुलवाने वाले ग्राहकों पर निगरानी रखें। भौतिक सत्यापन करें और मोबाइल नंबर का मिलान अनिवार्य करें।
- कॉर्पोरेट खाता खोलते समय 15 दिन बाद पुन: वेरिफिकेशन करें।
- बैंक में CCTV कैमरों का स्पष्ट प्रदर्शन करें और प्रवेश व पिछले हिस्से में कैमरा लगाएं।
- संदेही लेनदेन की प्रक्रिया और बैंक के दिशा-निर्देशों की विस्तृत चर्चा करें।
- डिमांड ड्राफ्ट से पैसे ट्रांसफर करने से पहले पूरी तरह वेरिफाई करें।
- नए खाते खोलते समय गारंटर का उपयोग अनिवार्य करें।
- चौथे स्तर के बाद राशि वेरिफाई कर होल्ड करें और खाता तभी चालू रखें।
- लीगल विभाग के लिए बैंक अधिकारी और मोबाइल नंबर जारी करें ताकि स्थानांतरण पर परेशानी न हो।
- बार-बार खाता खोलने वाले ग्राहकों की पहचान कर पुलिस को सूचना दें।
- पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाए ताकि कार्रवाई में बाधा न आए।
🔹 एसएसपी का मुख्य संदेश
डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए बैंक अधिकारियों को विशेष सतर्कता अपनाने, डिमांड ड्राफ्ट और संदिग्ध खातों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया सख्त करने और बार-बार खाता खुलवाने वाले व्यक्तियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
यह बैठक साइबर अपराध से सुरक्षा बढ़ाने और लोगों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम मानी जा रही है।

