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​गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर ऑटोइम्यून विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से परिधीय तंत्रिकाओं पर हमला करती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नता और गंभीर मामलों में लकवा हो सकता है।

लक्षण:

  • प्रारंभिक लक्षण: पैरों और हाथों में झुनझुनी या सुन्नता, जो धीरे-धीरे बढ़ती है। ​
  • मांसपेशियों की कमजोरी: पैरों में कमजोरी से शुरू होकर ऊपरी शरीर और बाहों तक फैल सकती है। ​
  • अन्य लक्षण: सांस लेने, बोलने या निगलने में कठिनाई, हृदय गति और रक्तचाप में असामान्यताएं। ​

कारण:

GBS का सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन यह अक्सर श्वसन या जठरांत्र संबंधी संक्रमण के बाद विकसित होता है। कुछ मामलों में, सर्जरी, टीकाकरण या अन्य बीमारियां भी ट्रिगर के रूप में कार्य कर सकती हैं।

उपचार:

  • इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी (IVIg): स्वस्थ दाताओं से प्राप्त एंटीबॉडी को रोगी में डाला जाता है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने और परिधीय तंत्रिकाओं पर होने वाले हमलों को कम करने में मदद मिलती है। ​
  • प्लाज्मा फेरिसिस (प्लाज्मा अदला-बदली): रक्त से हानिकारक एंटीबॉडीज को निकालने की प्रक्रिया। ​
  • सहायक देखभाल: सांस लेने में सहायता, फिजियोथेरेपी और अन्य सहायक उपचार शामिल हैं। ​

निष्कर्ष:

गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक गंभीर स्थिति है, लेकिन समय पर निदान और उचित उपचार से अधिकांश लोग पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। यदि आप या आपके परिचितों में उपरोक्त लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।​

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