भोपाल में आयोजित दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के 50 से अधिक विधायकों ने भाग लिया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा, रोजगार, नशे और लोकतंत्र जैसे अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी।
राजस्थान के शिव से निर्दलीय विधायक Ravindra Singh Bhati ने कहा कि देश के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों का शिक्षित होना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि विधायकों, सांसदों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल नए स्कूल भवन बनाने से शिक्षा का स्तर बेहतर हो पाएगा।

राजस्थान के सादुलशहर से भाजपा विधायक Gurveer Singh ने नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि उन्होंने गुरुद्वारे में संकल्प लिया है कि वे कभी भी नशे या अवैध गतिविधियों के लिए किसी की सिफारिश नहीं करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें चुनाव ही क्यों न हारना पड़े। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए फैलाए जा रहे नशे पर भी चिंता जताई।
मध्य प्रदेश के सतना से कांग्रेस विधायक Siddharth Kushwaha ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के चुनाव में पैसे का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जिससे लोकतंत्र प्रभावित हो सकता है।
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ से कांग्रेस विधायक Harshita Swami Baghel ने युवाओं के लिए रोजगार को सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ युवाओं को कौशल और स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा मंत्री Guru Khushwant Saheb ने बताया कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से रोजगार तक जोड़ने के लिए काम कर रही है। इसके तहत करियर मार्गदर्शन, सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग और आईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि युवा नौकरी पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाले भी बन सकें।
मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है और हालात ऑटोक्रेसी की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। वहीं भोपाल उत्तर से विधायक Atif Aqueel ने प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये और विधायक निधि की सीमाओं पर सवाल उठाए।
अटेर से कांग्रेस विधायक Hemant Katare ने फ्रीबीज योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सीधे पैसा देने के बजाय उन्हें रोजगार के अवसर देना ज्यादा जरूरी है।
सम्मेलन में कुल मिलाकर शिक्षा सुधार, नशे पर रोक, रोजगार सृजन और लोकतंत्र की मजबूती जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए।

