
राष्ट्रपति ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को मंजूरी दी: प्रमुख बदलावों की जानकारी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को मंजूरी दे दी है, जो 1995 के वक्फ अधिनियम में महत्वपूर्ण बदलाव लाता है। यह संशोधन वक्फ संपत्तियों (इस्लामिक धार्मिक या चैरिटेबल ट्रस्ट) के प्रबंधन को अधिक सुगठित और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखता है।
पृष्ठभूमि और विधायी प्रक्रिया
- इस संशोधन विधेयक को पहली बार अगस्त 2024 में लोकसभा में पेश किया गया था।
- इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) द्वारा जांचा गया, जिसने कुछ सुझावों को शामिल करने के बाद इसे मंजूरी दी।
- अब यह कानून के रूप में लागू हो गया है।

प्रमुख संशोधन और उनके प्रभाव
1. अधिनियम का नया नाम और उद्देश्य
- 1995 के कानून का नाम बदलकर “एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम” कर दिया गया है, ताकि वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा सके।
2. वक्फ संपत्ति घोषित करने के नए नियम
- अब केवल पांच साल से मुस्लिम धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ संपत्ति घोषित कर सकता है।
- संपत्ति का मालिकाना हक घोषित करने वाले के पास होना चाहिए।
- “उपयोग के आधार पर वक्फ” (जहां लंबे समय तक धार्मिक उपयोग से संपत्ति स्वतः वक्फ मान ली जाती थी) का प्रावधान हटा दिया गया है।
- वक्फ-अल-औलाद (पारिवारिक वक्फ) के तहत कानूनी वारिसों, विशेषकर महिलाओं, को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
3. केंद्रीय वक्फ परिषद में बदलाव
- पहले सभी सदस्य मुस्लिम होते थे, जिनमें कम से कम दो महिलाएं शामिल होती थीं।
- अब दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा।
- सांसद, पूर्व न्यायाधीश और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए मुस्लिम होने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।
- हालांकि, इस्लामिक विद्वान, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों का मुस्लिम होना अभी भी जरूरी है, साथ ही कम से कम दो महिला सदस्य होनी चाहिए।
4. केंद्र सरकार की बढ़ी हुई भूमिका
- अब केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन, लेखा परीक्षा और बोर्ड कार्यवाही से जुड़े नियम बना सकती है।
- राज्य सरकारों द्वारा कराई जाने वाली लेखा परीक्षा अब CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) या नामित अधिकारी द्वारा की जाएगी।
5. अधिक मुस्लिम समुदायों को मान्यता
- पहले केवल सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड ही बनाए जा सकते थे, यदि शिया वक्फ संपत्तियां राज्य की कुल वक्फ संपत्तियों के 15% से अधिक होती थीं।
- अब अगाखानी और बोहरा समुदायों के लिए भी अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया है।
6. वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसलों में बदलाव
- पहले वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले अंतिम होते थे और न्यायालयों में अपील नहीं की जा सकती थी।
- अब पीड़ित पक्ष 90 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं।
ये बदलाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इन संशोधनों का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना, पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक दक्षता सुधारना है। हालांकि, कुछ प्रावधान—जैसे वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति—पर बहस हो सकती है।
