छात्रों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के आधार पर विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में प्रमाणित मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता (काउंसलर) की तैनाती अनिवार्य होगी।
समग्र शिक्षा राज्य परियोजना द्वारा जारी 14 बिंदुओं की इस गाइडलाइन को सभी जिलों के कलेक्टरों को भेजा गया है और इसके पालन के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
कोविड-19 के बाद बढ़ी छात्रों की मानसिक समस्या
शिक्षा विभाग ने माना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है, जिसके चलते आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है।
इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षा उपायों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं।
हर संस्थान में काउंसलर या मनोवैज्ञानिक अनिवार्य
गाइडलाइन के अनुसार, जिन शिक्षण संस्थानों में 100 या उससे अधिक छात्र हैं, वहां स्थायी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति करनी होगी।
छोटे संस्थानों को जरूरत पड़ने पर बाहरी परामर्शदाताओं से रेफरल सिस्टम बनाना होगा।
हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर इग्नू से गाइडेंस एंड काउंसलिंग में डिप्लोमा प्राप्त शिक्षक भी काउंसलिंग की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।
निजी स्कूलों के लिए भी यह नियम अनिवार्य रहेगा।
सुरक्षा उपाय और अनुशासनिक बदलाव
नई गाइडलाइन में संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि—
- पंखों में सेफ्टी डिवाइस लगाए जाएं।
- छत और बालकनी तक छात्रों की पहुंच सीमित की जाए।
- छात्रावासों को उत्पीड़न मुक्त रखा जाए।
- स्कूलों और हॉस्टलों में हेल्पलाइन नंबर 8448440632 स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए।
- माता-पिता और अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
अब नहीं बनेंगे ‘मेधावी छात्रों’ के अलग बैच
शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि अब किसी भी संस्थान में छात्रों की क्षमता या अंकों के आधार पर अलग-अलग बैच नहीं बनाए जाएंगे।
विभागीय सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने सभी जिलों के कलेक्टरों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जिला स्तरीय निगरानी समिति बनेगी
गाइडलाइन के अनुसार, आत्महत्या रोकथाम उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
इसमें शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य और बाल संरक्षण विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसके साथ ही दो सिविल सोसायटी सदस्य और दो शिक्षाविद भी समिति में रहेंगे।
समिति छात्रों से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, प्रशिक्षण और परामर्श का गोपनीय रिकॉर्ड रखेगी और हर साल उसकी रिपोर्ट तैयार करेगी।
बच्चों से अपील — जीवन सबसे कीमती है
शिक्षा विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे कभी भी गलत कदम न उठाएं।
माता-पिता अपनी सीमाओं के बावजूद बच्चों को बेहतर भविष्य देने की कोशिश करते हैं।
इसलिए हर छात्र को मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
हर समस्या का समाधान है, बस मदद मांगने से झिझकना नहीं चाहिए।

