
रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: 970 करोड़ खर्च, पर जमीन पर नहीं दिखे परिणाम
रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 970 करोड़ रुपए से अधिक का फंड आवंटित किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर शहरवासियों को इसका कोई खास लाभ नहीं मिला। कई प्रोजेक्ट अधूरे या बर्बाद हो चुके हैं, जबकि कुछ पर खर्च हुए करोड़ों का हिसाब भी स्पष्ट नहीं है।
प्रमुख मुद्दे:
- शहीद विद्याचरण शुक्ल चौक:
- 30.29 लाख रुपए खर्च करके बनाया गया, लेकिन अब बदहाल हालत में।
- स्मार्ट लाइट्स खराब, कोई रखरखाव नहीं।
- हेल्दी हार्ट ट्रैक (सप्रे शाला):
- 1.42 करोड़ रुपए खर्च करके बनाया गया, लेकिन अब बेकार पड़ा है।
- बाद में दोबारा 2.50 करोड़ रुपए सौंदर्यीकरण पर खर्च किए गए।
- स्मार्ट टॉयलेट व बस स्टॉप:
- कई स्मार्ट टॉयलेट बंद पड़े हैं।
- एसी बस स्टॉप या तो दुकानों में तब्दील हो गए या फिर बेघरों का अड्डा बन गए।
- नेकी की दीवार (अनुपम गार्डन):
- 40 लाख रुपए की लागत से बनी फाइबर की दीवार आग लगने से नष्ट हो गई।
जांच की मांग, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं:
- भाजपा नेता लंबे समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हुई।
- महापौर मीनल चौबे ने भी स्मार्ट सिटी कंपनी के कामों में गड़बड़ी की बात कही, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन का पक्ष:
- स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि सभी खर्चे उचित हैं और भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं।
- हालांकि, आम नागरिकों और विपक्षी नेताओं का सवाल है कि इतने करोड़ों के बावजूद शहर में सुधार क्यों नहीं दिख रहा?
निष्कर्ष:
रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर पारदर्शिता की कमी और खराब योजना के कारण करोड़ों रुपए बर्बाद हुए हैं। अब मांग उठ रही है कि उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
