छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पर्यावरण प्रेमी रोम शंकर यादव को ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच पर फोर्स फॉर गुड हीरोज सम्मान से नवाजा गया। इस अवसर पर अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उनके पौधारोपण के काम की सराहना की और लोगों को भी इस पहल से जुड़ने की प्रेरणा दी।

🔹 रोम शंकर यादव का योगदान
रोम शंकर यादव पिछले 27 वर्षों से निरंतर पौधारोपण कर रहे हैं। उन्होंने जन्मदिन और अन्य मांगलिक अवसरों पर पौधे लगाने की अनोखी पहल शुरू की, जिससे अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
- अब तक उन्होंने 6.5 लाख पौधे रोपित और संरक्षित किए हैं।
- बीज छिड़काव के माध्यम से लगभग 2 लाख नए पौधे तैयार किए गए।
- कुल मिलाकर उन्होंने 8.5 लाख पेड़ों का हरित साम्राज्य स्थापित किया।
उनकी टीम ‘हितवा संगवारी’ में युवा सदस्य ज्ञानप्रकाश साहू, प्रेमनारायण वर्मा, सरोज साहू, राजेश चंद्राकर और विश्वकुमार साहू शामिल हैं, जो पौधों की देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा का काम भी करते हैं।
🔹 अमिताभ बच्चन की प्रतिक्रिया
KBC के सेट पर अमिताभ बच्चन ने कहा कि रोम शंकर की यह पहल समाज में नई चेतना जगाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने परिवार के जन्मदिन पर भी वह पौधा लगाएँगे और बच्चों के नाम से इसे अंकित करेंगे।
बच्चों के नाम पर पौधा लगाने की प्रथा से भविष्य की पीढ़ियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आएगी। अमिताभ ने दर्शकों से भी अपील की कि हर कोई अपने जन्मदिन या किसी खुशी के मौके पर पौधा लगाएँ।
🔹 रोम शंकर की प्रेरणा और संघर्ष
रिसाली नगर निगम क्षेत्र के डूंडेरा गांव के रहने वाले रोम शंकर पेशे से पत्रकार हैं। बचपन से पेड़ों के प्रति लगाव और पर्यावरण संरक्षण में गहरी रुचि के चलते उन्होंने मरौदा डैम और आसपास के इलाकों में पर्यावरण संरक्षण की पहल शुरू की।
1997-98 में भिलाई स्टील प्लांट द्वारा लगाए गए पौधों की रक्षा के लिए उन्होंने अभियान चलाया और कई बार विरोध, धमकियाँ और पुलिस बुलाने की स्थिति का सामना किया। आज उनकी टीम ने साढ़े छह लाख से अधिक पेड़ों को कटने से बचाया और दो लाख नए पौधे तैयार किए।
🔹 केबीसी से बढ़ा संदेश
केबीसी मंच पर सम्मान मिलने के बाद रोम शंकर यादव का संदेश देशभर में फैल गया। उनका कहना है कि अगर हर व्यक्ति किसी अवसर पर एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो पृथ्वी फिर से हरी-भरी बन सकती है।
इस सम्मान के माध्यम से उनके कार्यों को आदित्य बिड़ला ग्रुप की ओर से मान्यता मिली और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का पल बना।

