रायपुर में बच्चों में दांतों की सड़न और कैविटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। छोटे बच्चे भी अब काले पड़े दांत, मसूड़ों से खून आना और तेज दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों की गलत खान-पान की आदतें और नियमित रूप से दांत साफ न करना है।
जंक फूड और मिठाइयां मुख्य वजह
डेंटल कॉलेज के बाल दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल पांडे के अनुसार, चॉकलेट, टॉफी और अन्य मीठा खाद्य पदार्थ बच्चों के दांतों के लिए बेहद हानिकारक हैं। बाजार में उपलब्ध ये मिठाइयां रासायनिक शर्करा से बनी होती हैं, जो दांतों पर चिपक जाती हैं और मसूड़ों को कमजोर करती हैं।
डॉ. पांडे ने बताया कि बच्चों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे दांत सड़ते हैं। बोतल में रात भर रखे गए दूध से भी दांतों को नुकसान होता है। छोटे बच्चे सोते समय भी बोतल मुंह में रखते हैं, जिससे दांत जल्दी खराब होने लगते हैं।
गंभीर समस्या, बढ़ती संख्या
राजधानी के डेंटल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग में हर महीने करीब 800 बच्चे दांत दर्द और सड़न की शिकायत लेकर आते हैं। इनमें ज्यादातर 5 से 10 साल की उम्र के बच्चे हैं। इनमें 60–70 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं, जो नियमित रूप से जंक फूड और चॉकलेट खाते हैं।
अधिकतर बच्चे तब डॉक्टर के पास आते हैं, जब समस्या गंभीर हो चुकी होती है – जैसे दांत में सूजन, खाने-पीने में कठिनाई और तेज दर्द। प्रारंभिक जांच और समय पर इलाज से राहत मिल सकती है, लेकिन लापरवाही करने पर दांत जल्दी खराब हो जाते हैं।
बचाव और सावधानी
- बच्चों को दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना सिखाएं।
- मीठा खाने के बाद मुंह धोने या कुल्ला करवाएं।
- बोतल में दूध पिलाने से बचें, खासकर रात में।
- छोटे बच्चों को सही तरीके से ब्रश करना सिखाएं।
- हर छह महीने में डेंटिस्ट को दिखाएं।
डॉ. पांडे ने चेतावनी दी कि जब तक बच्चे नियमित रूप से दांत साफ नहीं करेंगे और मिठाई पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक यह समस्या बढ़ती रहेगी। सही देखभाल और समय पर इलाज से बच्चों के दांत लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।

