मिसिंग चिल्ड्रन रिपोर्ट: बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ‘मिसिंग चिल्ड्रन’ रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के लापता होने के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। पिछले लगभग पांच वर्षों से राज्य लगातार इस सूची के टॉप-10 राज्यों में बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कुल 982 बच्चे लापता हुए। इनमें से 582 बच्चों को पुलिस और प्रशासन ने खोज लिया है, जबकि 400 से अधिक बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

राज्य के कुछ जिलों में बच्चों के गायब होने के मामले अधिक सामने आए हैं। जांजगीर-चांपा इस सूची में पहले स्थान पर है। इसके बाद रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों का नाम शामिल है।

लापता बच्चों की तलाश के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 559 बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। बरामद किए गए बच्चों में सबसे अधिक संख्या जांजगीर-चांपा जिले की बताई जा रही है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार रायपुर और बिलासपुर जैसे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में प्रवासी परिवारों की संख्या अधिक है। कई बार उनके बच्चे परिवार से बिछड़ जाते हैं या बिना जानकारी दिए अन्य शहरों की ओर चले जाते हैं। इसके अलावा मानव तस्करी के गिरोह भी बच्चों के लापता होने का एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक तस्कर बच्चों को बड़े शहरों में अधिक पैसे या अन्य लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और उनसे मजदूरी या अन्य काम करवाते हैं। ऑपरेशन मुस्कान के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों से पूछताछ में ऐसे मामलों का खुलासा भी हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देशभर में कुल 33,577 बच्चे लापता हुए। इनमें से 7,777 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जबकि बाकी बच्चों को खोज लिया गया है।

वहीं कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, गुजरात, लक्षद्वीप और दादर एवं नगर हवेली में इस अवधि के दौरान बच्चों के लापता होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार लापता बच्चों में 14 से 17 वर्ष की आयु के किशोर-किशोरियों की संख्या अधिक है और इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले ज्यादा पाई गई है।

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