जस्टिस यशवंत वर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बनाई जांच समिति

नई दिल्ली | 23 मार्च 2025 – दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट के आधार पर तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक किए हैं।

मुख्य घटनाक्रम:

14 मार्च: जस्टिस वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना।

15 मार्च: कथित रूप से जले हुए नोटों के बंडल मिलने की खबर।

20 मार्च: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई गई।

21 मार्च: दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय ने रिपोर्ट सौंपी।

22 मार्च: सीजेआई संजीव खन्ना ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी और जस्टिस वर्मा को न्यायिक कार्य से रोक दिया।

जांच समिति में शामिल न्यायाधीश:

  1. शील नागू – चीफ जस्टिस, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट
  2. जीएस संधावालिया – चीफ जस्टिस, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट
  3. अनु शिवरामन – जस्टिस, कर्नाटक हाई कोर्ट

सीजेआई ने जस्टिस वर्मा से मांगा स्पष्टीकरण:

  1. आपके बंगले में मिली नकदी के बारे में क्या कहना है?
  2. नकदी का स्रोत स्पष्ट करें।
  3. 15 मार्च की सुबह जले हुए नोटों को किसने हटाया?

जस्टिस वर्मा का जवाब:

मुझे या मेरे परिवार को नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं।

स्टोर रूम खुला था, बाहरी लोग आते-जाते थे।

मुझे फंसाने की साजिश हो रही है, जांच होनी चाहिए।

पुलिस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

घटना 30, तुगलक क्रीसेंट बंगले में हुई।

स्टोर रूम में आग लगी, जहां अधजली बोरियों में भारतीय मुद्रा के अवशेष मिले।

आग बुझाने के बाद वहां से कुछ मलबा हटाया गया।

इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट सतर्कता बरत रहे हैं, और जांच जारी है।

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