करीब दो हफ्तों से चल रहे युद्ध के बावजूद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द जीत का दावा कर सकते हैं, लेकिन अंतिम स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान हमले जारी रखता है, जहाजों को निशाना बनाता है या जवाबी कार्रवाई करता है, तो युद्ध वास्तव में खत्म नहीं माना जाएगा। बताया जा रहा है कि ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमता को नुकसान पहुंचा है तथा कई शीर्ष नेता भी मारे गए हैं, फिर भी शासन अब तक कायम है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक असर
ईरान ने Strait of Hormuz में तेल आपूर्ति के रास्ते को प्रभावित कर वैश्विक बाजार में उथल-पुथल पैदा कर दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अभी भी हालात पलटने की क्षमता रखता है।
अमेरिका के भीतर भी दबाव
युद्ध का असर अमेरिका में भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, खाद महंगी हुई है और अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 13 तक पहुंच गया है। इसी साल होने वाले चुनावों को देखते हुए ट्रम्प पर युद्ध समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है।
अकेले युद्ध रोकने से तेल सस्ता नहीं होगा
ईरान ने यह भी दिखाया है कि वह होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि अमेरिका यदि एकतरफा युद्ध रोक भी दे, तो तेल की कीमतें तुरंत कम होना तय नहीं है। इससे फारस की खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों के सामने भी नई सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जीतना और लंबे समय के लिए खतरा खत्म करना अलग बातें हैं। आशंका जताई जा रही है कि ईरान के भीतर कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हो सकती हैं और वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी ला सकता है। बताया जा रहा है कि ईरान के पास अब भी बड़ी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे पश्चिमी देश गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं।
पिछले समझौते की पृष्ठभूमि
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama ने 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौता किया था, लेकिन ट्रम्प ने सत्ता में आने के बाद उसे समाप्त कर दिया। उस समय कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि समझौता खत्म होने से भविष्य में टकराव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
मिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों का कहना है कि इस युद्ध ने स्थिति को आसान नहीं बल्कि अधिक जटिल बना दिया है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के लिए सुरक्षा चुनौती रहा है और मौजूदा हालात में क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ सकती है।

