राजस्व विभाग ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने के लिए 10 नई सुविधाएं लागू की हैं। इनमें सबसे अहम सुविधा है “स्वतः नामांतरण”, जिसके तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही संबंधित खरीदार का नाम राजस्व रिकॉर्ड में खुद-ब-खुद दर्ज हो जाना चाहिए। इससे पहले तक नामांतरण के लिए पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे कई बार महीनों की देरी होती थी।
हालांकि इस नई सुविधा के बावजूद जिले के लोगों को इसका लाभ तुरंत नहीं मिल पा रहा है। पिछले एक सप्ताह में हुई कई रजिस्ट्री के मामलों में स्वत: नामांतरण नहीं हो पाया है, जिससे पक्षकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नई प्रणाली में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं और सर्वर अपग्रेड हो रहा है, जिस कारण शुरुआती दिनों में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन जल्द ही सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी और यह सुविधा आम नागरिकों के लिए पूरी तरह सुगम हो जाएगी।
इस सुविधा से भविष्य में नागरिकों को न सिर्फ समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि फर्जीवाड़े के मामलों में भी कमी आएगी। पहले रजिस्ट्री के बाद संपत्ति को नामांतरण से पहले किसी और को बेचने जैसे धोखाधड़ी के मामले सामने आते थे। लेकिन अब रजिस्ट्री के साथ ही स्वत: नाम दर्ज हो जाने से यह खतरा कम हो जाएगा।
जांजगीर में पेंडिंग हैं दर्जनों नामांतरण
जांजगीर जिले के उप पंजीयक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह डिजिटल सिग्नेचर की अनुपलब्धता के कारण नामांतरण की प्रक्रिया रुकी हुई थी। हालांकि अब शुक्रवार से प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है और सभी लंबित नामांतरण जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे।

नई 10 सुविधाएं इस प्रकार हैं:
- आधार आधारित सत्यापन से फर्जी रजिस्ट्री पर रोक
- रजिस्ट्री दस्तावेजों की खोज और डाउनलोड की सुविधा
- ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाण पत्र उपलब्धता
- स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क का कैशलेस भुगतान
- वॉट्सऐप के माध्यम से सेवाएं
- डिजीलॉकर इंटीग्रेशन
- रजिस्ट्री दस्तावेजों का स्वत: निर्माण
- घर बैठे स्टांप सहित दस्तावेज निर्माण
- घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा
- रजिस्ट्री के साथ स्वत: नामांतरण
इन बदलावों के बाद उम्मीद है कि आम जनता को रजिस्ट्री और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं में बड़ी राहत मिलेगी और भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा।



