दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत रविवार से दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस ने सार्वजनिक विरोध की शुरुआत कर दी है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता दुर्ग के गांधी प्रतिमा स्थल पर सुबह से शाम तक उपवास पर बैठे रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने और मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया।
25 फरवरी तक चलेगा आंदोलन
दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी के साथ छल किया है।
उनका आरोप है कि बीते 11 वर्षों में मजदूरों को औसतन सिर्फ 38 दिन का काम मिला है और “गारंटी” शब्द को ही कानून से हटाने की कोशिश की जा रही है।
हर साल घट रहे मानव दिवस
राकेश ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दुर्ग जिले में मनरेगा के मानव दिवस लगातार घट रहे हैं।
- वर्ष 2023-24 में 45 लाख मानव दिवस
- वर्ष 2024-25 में घटकर 32 लाख
- चालू वित्तीय वर्ष में सिर्फ 18 लाख मानव दिवस
उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का पूरा योगदान था, लेकिन अब इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।

सरकारी खजाने पर बढ़ाया जा रहा दबाव
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ रही है। मनरेगा में लगातार कटौती कर राज्य सरकार के अंशदान को बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा।
बीजेपी अमीरों की पार्टी: कांग्रेस
भिलाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था। अब न सिर्फ योजना का स्वरूप बदला जा रहा है, बल्कि बजट में भी कटौती की गई है।
उन्होंने भाजपा को अमीरों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह मजदूर विरोधी सोच का परिणाम है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर है।
125 दिन का वादा भी जुमला: साहू
कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा की थी, लेकिन भाजपा सरकार मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर रही है। उन्होंने 125 दिन रोजगार के वादे को भी 15 लाख और 2 करोड़ नौकरियों की तरह जुमला करार दिया।
योजना को खत्म करने का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

