बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाने की पहल, हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी होगी प्रदर्शित

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बच्चों से संबंधित मामलों के निपटारे में पुलिस की प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य के सभी थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी और बच्चों की आपातकालीन हेल्पलाइन 1098 की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की अनुशंसा की है।

इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर सहित प्रदेश के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भेजे गए हैं। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि आयोग में लंबित मामलों की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई थानों में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होती। कई बार तो स्वयं पुलिसकर्मियों को भी यह जानकारी नहीं रहती।

उन्होंने बताया कि थाना प्रभारियों के स्थानांतरण के बाद कई बार नए बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी लंबे समय तक अपडेट नहीं हो पाती। इसके अलावा कुछ मामलों में जिला स्तर पर गठित विशेष किशोर पुलिस इकाई की जानकारी भी थानों में स्पष्ट नहीं रहती।

बच्चों से जुड़े मामलों में नहीं हो पाता उचित व्यवहार

आयोग के अनुसार इन कमियों के कारण बच्चों से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई बार बाल-सुलभ प्रक्रिया का पालन नहीं हो पाता। इसी को ध्यान में रखते हुए थानों में स्पष्ट और स्थायी डिस्प्ले व्यवस्था लागू करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पुलिसकर्मी और आम नागरिक दोनों को आवश्यक जानकारी आसानी से मिल सके।

कानून में भी है स्पष्ट प्रावधान

आयोग ने अपनी अनुशंसा में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 का उल्लेख करते हुए बताया कि इस कानून के तहत हर थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी और विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन अनिवार्य है। साथ ही बच्चों से जुड़े कानूनों के बारे में जनजागरूकता फैलाना भी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

इस तरह बनाया जाएगा डिस्प्ले बोर्ड

आयोग के निर्देश के अनुसार प्रत्येक थाने में प्रमुख दीवार के साथ दो अन्य स्थानों पर आयताकार डिस्प्ले बोर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए दीवार पर काले रंग से पुताई की जाएगी और बॉर्डर स्लेट की तरह बनाई जाएगी ताकि यह बच्चों के लिए भी सहज और आकर्षक दिखाई दे।

बोर्ड के अंदर सफेद रंग से जिले की विशेष किशोर पुलिस इकाई के प्रभारी का पदनाम, थाने के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का पदनाम और बच्चों की हेल्पलाइन नंबर 1098 लिखा जाएगा। संबंधित अधिकारियों के नाम चॉक से लिखे जाएंगे, ताकि उनके स्थानांतरण होने पर आसानी से बदला जा सके।

31 मार्च तक पूरी करनी होगी व्यवस्था

आयोग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि यह व्यवस्था 31 मार्च 2026 तक हर हाल में लागू कर दी जाए। साथ ही डिस्प्ले बोर्ड की तस्वीरों के साथ पालन प्रतिवेदन आयोग को भेजने को भी कहा गया है।

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