छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव 2025 का आयोजन आगामी 1 नवंबर को भव्य रूप से किया जाएगा। इस बार राज्योत्सव खास होने वाला है क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। पीएम की प्रस्तावित यात्रा को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार (23 अक्टूबर) को नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला स्थल का निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया।
सीएम ने अफसरों को निर्देश दिए कि सभी कार्य तय समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव प्रदेश की पहचान और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संस्कृति और उपलब्धियों पर विशेष स्टॉल लगेंगे:
सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले में आने वाले लोगों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और विकास यात्रा से परिचित कराने के लिए अलग-अलग थीम आधारित स्टॉल लगाए जाएं। इसके साथ ही केंद्र सरकार से मिले अवार्ड और उपलब्धियों की जानकारी भी प्रदर्शनी के माध्यम से दी जाएगी।
मंत्रियों ने ली समीक्षा बैठक:
राज्योत्सव और पीएम मोदी के दौरे की तैयारियों को लेकर गुरुवार (23 अक्टूबर) को डिप्टी सीएम अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने नवा रायपुर के विश्राम भवन में समीक्षा बैठक की थी। मंत्रियों ने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री का आगमन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है, इसलिए आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बनाया जाए।

पूरे साल चलेगा रजत जयंती उत्सव:
इस वर्ष छत्तीसगढ़ राज्य अपने 25वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर रहा है। सरकार ने इसे “रजत जयंती वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। वर्षभर प्रदेशभर में अलग-अलग संस्कृतिक और विकासात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हर महीने अलग-अलग थीम पर आयोजन होंगे, ताकि गांव से लेकर राजधानी तक सभी लोग राज्य की संस्कृति से जुड़ सकें।
मेला स्थल पर अत्याधुनिक सुविधाएं:
नवा रायपुर स्थित मेला परिसर में तीन विशाल डोम संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें 60 LED स्क्रीन लगाई जाएंगी। मुख्य मंच के पास डिजिटल प्रदर्शनी और प्रधानमंत्री आवास योजना मॉडल प्रदर्शित किया जाएगा।

लोगों की सुविधा के लिए 40,000 वाहनों की पार्किंग, 300 शौचालय, 20-बेड अस्थायी अस्पताल (ICU सहित), 25 एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड वाहनों की व्यवस्था की जा रही है।
सीएम ने कहा कि यह राज्योत्सव प्रदेश के गौरव, संस्कृति और एकता का प्रतीक बनेगा और इसे ऐतिहासिक रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

