छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी रहे आशीष वर्मा से जुड़ा एक वीडियो राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा ने इसे ‘गुंडागर्दी’ बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस ने इसे अधूरा और भ्रामक करार देते हुए सफाई दी है।
भाजपा का आरोप
भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर 21 सेकेंड का वीडियो साझा किया और दावा किया कि भूपेश सरकार के दौरान नियम-कायदों को अपनी निजी जागीर समझने वाले लोग अब अधिकारियों को धमका रहे हैं। भाजपा के अनुसार, वीडियो में आशीष वर्मा अधिकारियों को ‘आपका भी परिवार है’ कहकर धमकी देते हुए दिख रहे हैं।
भाजपा के कैप्शन में लिखा गया:
“भूपेश के ओएसडी रहे आशीष वर्मा की पाटन में चल रही गुंडागर्दी शर्मनाक है। भूपेश जी अपने गुर्गों को संभालिए, जो अधिकारियों को धमका रहे हैं।”
कांग्रेस का खंडन
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों का फौरन खंडन किया और पूरा 51 सेकेंड का वीडियो जारी किया। उनका दावा है कि भाजपा ने संपादित वीडियो चलाकर पूर्व मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों की छवि खराब करने की कोशिश की।
कांग्रेस के अनुसार, पूरा वीडियो दिखाता है कि वर्मा किसी को धमका नहीं रहे थे, बल्कि नियम और कानून का पालन करने की सलाह दे रहे थे। कांग्रेस द्वारा जारी वीडियो में वर्मा कहते हैं:
“आप अधिकारी हैं, नियम को फॉलो करवाने के लिए बैठे हैं। यदि जनप्रतिनिधि गलत प्रस्ताव लाता है, तो उसे रोकना आपकी जिम्मेदारी है। नियम न मानने पर दंड अधिकारी को ही मिलेगा।”

वर्मा की सफाई
आशीष वर्मा ने कहा कि उन्होंने किसी को धमकी नहीं दी, बल्कि समझाइश दी। उनका कहना है कि अधिकारियों का काम नियम और संविधान का पालन कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने आधा वीडियो चलाकर भ्रम फैलाया।
भाजपा का रुख
दुर्ग जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने कहा कि वीडियो में जो देखा जा रहा है, वही सच्चाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के दौरान भ्रष्टाचार और दादागिरी का माहौल था और अब भी कांग्रेस उसी मानसिकता में है कि सरकारी व्यवस्था उनकी निजी जागीर है।
विवाद की जड़: पाटन नगर पंचायत में दुकानों का आवंटन
विवाद पाटन नगर पंचायत के दुकान आवंटन से जुड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के कार्यकाल में बस स्टैंड के पास फुटकर व्यापारियों के लिए व्यवसायिक परिसर का निर्माण हुआ। 2022 में भवन तैयार होने के बावजूद आवंटन में देरी हुई।
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष आभास दुबे का आरोप है कि 193 आवेदकों में से केवल 37 को बिना सूचना चुना गया, रोस्टर प्रणाली का पालन नहीं हुआ और ज्यादातर दुकानों पर बीजेपी से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचा। इसी कारण हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की गई और फिलहाल आवंटन पर रोक लगी है।
प्रशासनिक जांच
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आदेश दिए कि नगर पंचायत पाटन में दुकानों के आवंटन में मिली भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच की जाए। एसडीएम पाटन को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर पंचायत के सीएमओ हेमंत वर्मा और अध्यक्ष योगेश भाले से संपर्क नहीं हो पाया।

