भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच एक जांच में सामने आया है कि डिपोर्ट किए जाने के बाद भी कई बांग्लादेशी नागरिक दोबारा भारत में प्रवेश करने में सफल हो रहे हैं। एक मामले में दिनाजपुर निवासी सद्दाम शेख को छत्तीसगढ़ और ओडिशा पुलिस ने दो बार असम बॉर्डर से वापस भेजा, लेकिन इसके बावजूद वह फिर भारत लौट आया और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रहने लगा।
जांच के दौरान पता चला कि सद्दाम कई वर्षों से देश के अलग-अलग हिस्सों—जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, गोवा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और छत्तीसगढ़—में लगातार ठिकाने बदलता रहा। हाल ही में उसके ओडिशा के बोरीगुम्मा इलाके में छिपे होने की जानकारी मिली थी।
सद्दाम ने कोंडागांव की एक स्थानीय युवती से शादी भी की है, जिससे उसका एक बच्चा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह फेरीवाले के रूप में संपर्क बनाकर स्थानीय लड़कियों को झांसे में लेता था, बाद में शादी कर उन्हें छोड़कर फरार हो जाता था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कई जिलों—कोंडागांव, जगदलपुर, सुकमा और महासमुंद—में ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पिछले एक साल में रायपुर, राजनांदगांव, रायगढ़ और मोहला-मानपुर में करीब 30 संदिग्धों को पकड़कर उनकी पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई, जिन्हें बाद में असम सीमा के जरिए डिपोर्ट किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि अधिकतर घुसपैठ पश्चिम बंगाल सीमा के जरिए हो रही है। ये लोग भारत में आकर छोटे-मोटे काम करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में चोरी और अन्य अपराधों में भी शामिल पाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा की भौगोलिक जटिलताओं, फेंसिंग की कमी और आबादी की नजदीकी के कारण घुसपैठ को पूरी तरह रोक पाना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और कड़ी निगरानी जरूरी है।

