रायपुर में ‘आधा नोट’ ट्रिक से 35 लाख की ठगी: हवाला रकम लेकर फरार आरोपी, जांच में जुटी पुलिस

रायपुर में प्लाईवुड कंपनी के एक कर्मचारी से 35 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने ‘आधा नोट’ ट्रिक का इस्तेमाल करते हुए हवाला की रकम हासिल की और मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर जांच शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, मुंबई निवासी करण शर्मा एक प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करता है। अपने मालिक के निर्देश पर वह 11 अप्रैल को रायपुर पहुंचा था। उसे एक व्यापारी से 35 लाख रुपये नकद लेकर दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

पहले चरण में करण ने तय स्थान पर पहुंचकर एक व्यापारी से आधे नोट के सीरियल नंबर मिलान के बाद 35 लाख रुपये प्राप्त किए। इसके बाद उसने अपने मालिक को इसकी सूचना दी। कुछ देर बाद उसे दूसरे व्यक्ति का संपर्क नंबर और एक अन्य आधे नोट का सीरियल नंबर दिया गया।

निर्देशानुसार करण वीआईपी तिराहा स्थित श्रीराम मंदिर के पास पहुंचा, जहां एक व्यक्ति ने उसे आधा नोट दिखाया। सीरियल नंबर मिलाने के बाद उसने बिना संदेह किए 35 लाख रुपये उस व्यक्ति को सौंप दिए।

हालांकि, जब करण ने उस नोट की तस्वीर अपने मालिक को भेजी, तो पता चला कि नोट का सीरियल नंबर फर्जी है और पहले सौदे से मेल नहीं खाता। तब उसे अहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।

पीड़ित की शिकायत पर तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति नजर आया है। साथ ही जिस मोबाइल नंबर से संपर्क किया गया था, उसके आधार पर भी आरोपियों की तलाश जारी है।

मामले में हवाला लेन-देन सामने आने के बाद इनकम टैक्स विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है। विभाग ने पैसों के स्रोत और लेन-देन से जुड़ी जानकारी मांगी है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रायपुर में प्रतिदिन करीब 30 करोड़ रुपये का हवाला कारोबार होता है। रायपुर से मुंबई और झारखंड तक पैसे भेजने की मांग अधिक बताई जाती है। इस काम में कमीशन के तौर पर प्रति एक लाख रुपये पर 1500 से 2000 रुपये तक लिए जाते हैं।

बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क देश के बाहर भी सक्रिय है और दुबई, श्रीलंका तथा नेपाल जैसे देशों तक लेन-देन किए जाने का दावा किया जाता है।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में भी हवाला नेटवर्क की पुष्टि हो चुकी है। महादेव ऐप से जुड़े मामले में चार्जशीट में यह सामने आया था कि हवाला के जरिए पैसे अधिकारियों और अन्य लोगों तक पहुंचाए जाते थे। इस नेटवर्क में कई लोग बतौर कूरियर भी काम करते थे।

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