महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी घोटाला: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिली छोटी और घटिया साड़ियां

महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी वितरण को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। ठेकेदारों द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को निर्धारित माप से छोटी और खराब गुणवत्ता की साड़ियां दी गई हैं। वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश की लगभग 1.94 लाख महिलाओं के लिए साड़ियों की खरीदी की गई थी।

इस खरीद की जिम्मेदारी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को दी गई थी। करीब 9.7 करोड़ रुपए खर्च कर प्रत्येक साड़ी 500 रुपए में खरीदी गई। कार्यादेश के अनुसार साड़ी की कुल लंबाई 6.3 मीटर होनी थी, जिसमें 5.5 मीटर साड़ी और 80 सेंटीमीटर ब्लाउज पीस शामिल था। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच इन साड़ियों का वितरण किया गया।

लेकिन कई जिलों में वितरित साड़ियों की लंबाई तय मानक से कम पाई गई। कई जगहों पर सिर्फ 5 मीटर की साड़ी ही दी गई, जिससे कार्यकर्ताओं को पहनने में परेशानी हो रही है। इतना ही नहीं, साड़ी धोने पर रंग निकल जाता है और कपड़ा सिकुड़कर और छोटा हो जाता है।

कार्यकर्ताओं ने गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दी गई साड़ियां बाजार में 250 रुपए या उससे भी कम कीमत की लगती हैं। शिकायतों के बाद विभाग के संचालक ने पूरे प्रदेश में साड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं। जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी साड़ियों में कमी पाई जाए, उन्हें बदला जाए।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर मंत्रालय को पत्र भेजकर साड़ियां वापस लेने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यूनिफॉर्म उनके सम्मान और पहचान से जुड़ी होती है। कई कार्यकर्ता नई साड़ियां छोड़कर पुरानी पहन रही हैं, जबकि कुछ बिना यूनिफॉर्म के ही काम कर रही हैं।

बिलासपुर जिले के मंगला, निरतू, घूटकू और गनियारी क्षेत्रों में जांच के दौरान पाया गया कि साड़ियों की लंबाई और चौड़ाई दोनों कम हैं। पानी में डालते ही रंग छूट गया और कपड़ा काफी पतला व पारदर्शी निकला।

बिलासपुर में ही 1930 महिलाओं ने साड़ियों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई है और उनका उपयोग बंद कर दिया है। कुछ कार्यकर्ताओं ने बताया कि पहले दी गई साड़ियां सही माप की थीं, लेकिन इस बार की साड़ियां बेहद खराब हैं।

मामले की जांच के लिए संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने एक समिति का गठन किया है, जिसने दुर्ग, धमतरी और रायगढ़ सहित कई जिलों में जांच की है। रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

फिलहाल खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को भुगतान रोक दिया गया है। दोषपूर्ण साड़ियों को बदलने के निर्देश दिए गए हैं और संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि जहां-जहां खराब साड़ियों की सप्लाई हुई है, उन्हें वापस लेकर नई साड़ियां दी जाएंगी।

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