छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि एक महिला आरक्षक के साथ मारपीट और बदसलूकी की गंभीर घटना भी सामने आई है। आरोप है कि महिला आरक्षक को दौड़ाकर पीटा गया और उसकी वर्दी फाड़ दी गई, साथ ही इस अमानवीय कृत्य का वीडियो भी बनाया गया।
इस मामले में पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 अन्य की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों में मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास और वनमाली राठिया शामिल हैं।

कैसे बिगड़े हालात
दरअसल, 8 दिसंबर को धौराभाठा में JPL के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक को लेकर हुई जनसुनवाई के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर को लिबरा चौक पर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए गए।
उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों, एम्बुलेंस और अन्य सरकारी गाड़ियों में आग लगा दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट पहुंचे, जहां कन्वेयर बेल्ट, ट्रैक्टर और अन्य मशीनों को नुकसान पहुंचाया गया।

अधिकारियों की मौजूदगी में भी हिंसा
स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद पथराव और आगजनी जारी रही।
JPL प्रबंधन का फैसला
लगातार विरोध और बिगड़ते हालात को देखते हुए JPL प्रबंधन ने गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने महिला आरक्षक के साथ हुई घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध” बताया और कहा कि सरकार को जनता में बढ़ते गुस्से पर आत्ममंथन करना चाहिए।
वहीं बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने मामले की गहराई से जांच की बात भी कही।

