रायपुर।
राजधानी रायपुर की चर्चित साइंस कॉलेज चौपाटी, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, अब तोड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है। डेढ़ साल पहले बनी यह चौपाटी जल्द ही जमींदोज हो जाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगम को पत्र भेजकर चौपाटी को 15 नवंबर तक हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चौपाटी को हटाकर नालंदा-2 प्रोजेक्ट को यहां शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का टेंडर पूरा हो चुका है और अब कंपनी को अनुबंध सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
10 करोड़ की लागत से बनी थी आधुनिक चौपाटी
रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 2023 में साइंस कॉलेज मैदान के सामने 60 दुकानों वाली चौपाटी तैयार की थी। उद्देश्य था कि इसे “यूथ हब” के रूप में विकसित किया जाए, जहां युवाओं को रोजगार और मनोरंजन दोनों के अवसर मिलें।
निर्माण पूरा होने के बाद इसे रायपुर के एक होटल कारोबारी को ठेके पर सौंपा गया, जिन्होंने आगे दुकानों को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। वर्तमान में चौपाटी पर कारोबार सुचारू रूप से चल रहा था और पार्किंग व्यवस्था भी सुव्यवस्थित थी।
लेकिन अब नगर निगम ने व्यापारी और दुकानदारों को ब्रिज के नीचे वैकल्पिक जगह देने का प्रस्ताव रखा है।
सवालों के घेरे में सरकार का फैसला
अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चलती चौपाटी को इतनी जल्दी तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्या इसे इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि यह कांग्रेस शासनकाल में बनी थी?
जब आसपास ही खाली जमीन मौजूद है, तो नालंदा-2 के लिए यही जगह क्यों चुनी गई?
अगर निर्माण या आवंटन प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, तो जांच होनी चाहिए, न कि करोड़ों की संरचना को तोड़ा जाना चाहिए — ऐसे तर्क भी सामने आ रहे हैं।
कैसे बनी चौपाटी विवाद का कारण
साइंस कॉलेज चौपाटी का निर्माण कांग्रेस शासनकाल में हुआ था। उस समय नगर निगम में कांग्रेस का महापौर था और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार थी।
पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने चौपाटी के विरोध में 14 दिन तक धरना दिया था, उनका आरोप था कि “यूथ हब” के नाम पर इसे व्यावसायिक केंद्र बना दिया गया है।
हालांकि तब रायपुर स्मार्ट सिटी ने निर्माण नहीं रोका और चौपाटी पूरी हुई।
भाजपा सरकार में चौपाटी तोड़ने की तैयारी
2023 में भाजपा सरकार के आने के बाद रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक राजेश मूणत ने इस चौपाटी को हटाने का प्रस्ताव रखा।
दोनों नेताओं ने दावा किया कि चौपाटी के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ रही हैं और यह “यूथ हब” के मूल उद्देश्य से भटक चुकी है।
इसके बाद नालंदा-2 प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनी, जिसे सूडा (SUDA) के तहत मंजूरी दी गई। अब इस प्रोजेक्ट का टेंडर फाइनल हो चुका है और कंपनी चयन की प्रक्रिया पूरी हो रही है।
राजेश मूणत का बयान
पूर्व लोक निर्माण मंत्री और विधायक राजेश मूणत ने कहा —
“चौपाटी का निर्माण नियमों के विरुद्ध हुआ था। यूथ हब के नाम पर व्यावसायिक काम शुरू कर दिए गए। अफसरों की लापरवाही से जनता का पैसा बर्बाद हुआ, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”
मूणत ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस शासन की गलतियों को सुधारना चाहती है और क्षेत्र को फिर से शैक्षणिक जोन के रूप में बहाल करेगी।
जनता के बीच विरोध और समर्थन दोनों
जहां कुछ लोग चौपाटी हटाने के फैसले को राजनीतिक बदले की भावना बता रहे हैं, वहीं अन्य लोग इसे शहर की योजनाबद्ध पुनर्विकास की प्रक्रिया कह रहे हैं।
फिलहाल, रायपुर की 10 करोड़ की चौपाटी अब राजनीतिक और प्रशासनिक tug-of-war का केंद्र बन चुकी है।

